नई दिल्ली: दिल्‍ली की एक कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के उन्नाव में 2017 में एक महिला के साथ रेप करने के दोषी कुलदीप सिंह सेंगर को शुक्रवार को अपराह्न दो बजे सजा उम्रकैद की सजा सुनाई है और 25 लाख का जुर्माना लगाया  है.  जिला जज धर्मेश शर्मा ने  कहा कि दोषी विधायक को बाकी बची
उम्र जेल में काटनी होगी. अदालत ने यह निर्देश भी दिया कि बलात्कार पीड़िता को उनकी मां के लिए 10 लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए.

उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद सेंगर तीस हजारी जिला अदालत परिसर के अदालत कक्ष में रो पड़ा. उसकी बहन और बेटी भी साथ में रोते हुए दिखाई दिए. उसे सोमवार को मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद भी रोते हुए देखा गया था.

कोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया कि पीड़िता और उसके परिवार को जीवन को खतरे का पता लगाए और जरूरी सुरक्षा उपलब्‍ध कराए. सीबीआई को यह भी आदेश दिया है कि पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्ष‍ित घर मुहैया कराया जाए.

अदालत ने कहा कि वे एक साल तक दिल्ली महिला आयोग द्वारा उपलब्ध कराये गये किराये के घर में रहेंगे. उत्तर प्रदेश सरकार को 15 हजार रुपए प्रति महीने किराया अदा करने का निर्देश भी दिया गया.

इस साल 28 जुलाई को बलात्कार पीड़िता की कार को एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गई.
हादसे में महिला की दो रिश्तेदारों की मौत हो गई. इस मामले में महिला के परिवार ने साजिश का आरोप लगाया था.

अदालत ने बीते सोमवार को सेंगर को भारतीय दंड संहिता और पोक्सो कानून के तहत दोषी ठहराया था. अपराध के समय बलात्कार पीड़िता नाबालिग थी. दालत ने बीजेपी से निष्कासित विधायक सेंगर को बीते सोमवार 16 दिसंबर को बलात्कार का दोषी करार दिया था. सीबीआई ने इस मामले में कोर्ट से विधायक कुलदीप सेंगर को आजीवन कारावास की सजा देने की मांग की थी और कहा कि यह व्यवस्था के खिलाफ एक व्यक्ति की न्याय की लड़ाई है. जांच एजेंसी ने अदालत से आग्रह किया था कि वह सेंगर को कानून में निर्धारित उम्रकैद की अधिकतम सजा दे.

सीबीआई ने सेंगर के लिए उम्रकैद की मांग की, सेंगर की नरमी बरतने की अपील
नई दिल्ली: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने वर्ष 2017 के उन्नाव बलात्कार मामले में दोषी साबित भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सेंगर को आजीवन कारावास की सजा देने की मांग की और कहा कि यह व्यवस्था के खिलाफ एक व्यक्ति की न्याय की लड़ाई है. जांच एजेंसी ने अदालत से आग्रह किया कि वह सेंगर को कानून में निर्धारित उम्रकैद की अधिकतम सजा दे.

– अदालत ने 16 दिसंबर को सजा पर फैसले के आदेश के लिए सुनवाई 20 दिसंबर तक टाल दी थी
– जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने सीबीआई, शिकायतकर्ता और दोषी की दलीलों पर संक्षिप्त सुनवाई की थी
– कोर्ट ने सजा के ऐलान के लिए कार्यवाही शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी थी
– सीबीआई और शिकायतकर्ता के वकील ने सेंगर के लिए अधिकतम सजा की मांग की थी
– सीबीआई ने कहा था कि जघन्य अपराधों में लड़कियों की चीख’ सुनने पर विचार किया जाना चाहिए

सीबीआई ने कहा था- न्याय की लड़ाई है
जांच एजेंसी के लोक अभियोजक अशोक भारतेन्दु ने कहा, यह व्यवस्था के खिलाफ एक व्यक्ति की न्याय की लड़ाई है. इसलिए हम दोषी को अधिकतम सजा देने की मांग करते हैं. सीबीआई के अभिवेदन का समर्थन करते हुए बलात्कार पीड़िता के वकील ने लड़की के लिए पर्याप्त मुआवजे की भी मांग की
– वकील ने कहा, बलात्कार पीड़िता को पर्याप्त मुआवजा दिया जाना चाहिए. क्योंकि दोषी लोक सेवक है, मुआवजा देते समय इस पर विचार किया जाना चाहिए.
– बलात्कार पीड़िता और उसके परिवार के वकील धर्मेंद्र शर्मा ने अदालत से कहा, महिला ने अपने पिता और दो महिला रिश्तेदारों को खो दिया. वह 2017 से कष्ट झेल रही है. उसे उसकी जड़ों से उखाड़ दिया गया है.

सेंगर के वकीलों ने कम सजा का आग्रह किया था
सेंगर के वकील ने हालांकि अदालत से आग्रह किया था कि वह दोषी को 10 साल कैद की न्यूनतम सजा दे क्योंकि उसका पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है. उसके वकील तनवीर अहमद ने कहा, उसका (सेंगर) राजनीतिक करियर बेदाग रहा है. जनता 2002 से लेकर अब तक उसे बार-बार विधानसभा सदस्य के रूप में चुनती रही है. उन्होंने कहा कि सेंगर की पथभ्रष्ट मानसिकता नहीं है.

सामाजिक और राजनीतिक कार्यों का हवाला भी दिया था
सेंगर की ओर से पेश हुए दो अन्य वकीलों-ध्रुव गुप्ता और तुशान रावल ने कहा था कि नेता 54 साल का है और दो नाबालिग बेटियों का पिता है. वकील ने आगे कहा कि सेंगर ने विधायक के रूप में विभिन्न विकास कार्य कराए हैं. बचाव पक्ष के वकील ने कहा, ‘‘उसने (सेंगर) उत्तर प्रदेश के एक गांव में पुलों का निर्माण कराया. उसने मौनपुर में कई संस्थानों का निर्माण किया. उसके अच्छे व्यवहार पर भी विचार किया जाना चाहिए. उसे न्यूनतम सजा दी जानी चाहिए.