लखनऊ: प्रदेश सरकार की ओर से बरती जा रही सख्‍ती का असर विश्‍वविद्यालयों के परीक्षा परिणामों पर भी देखने में आ रहा है. सोमवार को जारी हुए रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के बीएससी फाइनल के रिजल्ट पर इसका असर साफ दिखा. बैचलर ऑफ साइंस (बीएससी) में 61 फीसदी परीक्षार्थी फेल हो गए. रुहेलखंड विश्‍वविद्यालय के मात्र 39 प्रतिशत परीक्षार्थी ही मुश्किल से पास हो सके. उधर, बीएससी के खराब रिजल्‍ट का असर अब एमएससी दाखिलों पर पड़ेगा. क्‍योंकि पिछले साल 93 फीसदी रिजल्ट के बाद भी सीटें खाली रह गई थीं. ऐसे में इस साल तो हालात के और बिगड़ने के अनुमान जताए जा रहे हैं. Also Read - दिल्ली-एनसीआर में रहने वालों के लिए एकीकृत व्यवस्था हो: सुप्रीम कोर्ट

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बता दें कि इस साल रुहेलखंड विश्‍वविद्यालय की ओर से मुख्य परीक्षाओं में खूब सख्‍ती बरती गई थी. इसके लिए शासन स्तर पर मॉनीटरिंग और विश्‍वविदयालय के साथ जिला प्रशासन ने भी नकल पर रोक लगाने के लिए व्‍यापक कदम उठाए थे. परीक्षा के दौरान सीसीटीवी के जरिए निगरानी की गई थी. इस दौरान विवि के अफसरों ने विवि कैंपस के कंट्रोल रूम से ही 327 कॉलेजों में चल ही परीक्षाओं का ताजा हाल जाना. सीसीटीवी कमरों में ही नहीं मेन गेट, गैलरी, स्ट्रांगरुम में भी लगाए गए थे. इस साल बीएससी फाइनल में कुल 32000 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे. सोमवार को एक कॉलेज को छोड़कर सभी कॉलेजों के रिजल्ट रुहेलखंड विश्‍वविद्यालय ने जारी कर दिया. इसमें मात्र 39 फीसदी ही पास पाए, जबकि 61 फीसदी छात्र-छात्राएं दो से अधिक पेपरों में फेल हुए हैं.

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एमएससी की प्रवेश परीक्षा में बैठे छात्र भी फेल

रुहेलखंड विश्‍वविद्यालय की ओर से जारी बीएससी फाइनल के रिजल्ट ने प्राइवेट कॉलेजों की नींद उड़ा दी है. क्‍योंकि पिछले साल 93 फीसदी रिजल्ट था. इसके बाद भी एमएससी मैथ, फिजिक्स, केमिस्ट्री, जूलोजी, बॉटनी में एडमिशन के लिए प्राइवेट कॉलेज छात्रों का इंतजार करते रहे. कई चरण की काउंसलिंग के बाद 40 फीसदी सीटें खाली बच गई थी. ऐसे में इस बार तो हालात और भी खराब होने वाले हैं.