नई दिल्ली: तमाम जागरूकता कार्यक्रमों और प्रोत्साहन के बाद भी उत्तर प्रदेश में अस्पतालों में नहीं, बल्कि महिलाएं घरों में ही बच्चों को जन्म देती हैं. अधिकतर डिलीवरी घरों में ही होती है, जबकि सरकार की कोशिश रहती है कि ज्यादा से ज्यादा डिलीवरी अस्पतालों में हों ताकि किसी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके. घर में डिलीवरी होने के मामलों का सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) की ताजा रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, देश में उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा प्रसव घरों में होते हैं.

म्रत्यु दर में आई कमी
हालांकि, उत्तर प्रदेश में 2014-16 में मातृ मृत्युदर (एमएमआर) में 30 फीसदी की कमी आई है. देश में मातृ मृत्युदर का राष्ट्रीय औसत 22 फीसदी है. डब्ल्यूएचओ के अनुसार, एमएमआर में 1990 के प्रति 100,000 जीवित प्रसव पर 556 मामले के मुकाबले 2016 में यह प्रति 100,000 जीवित प्रसव पर यह 130 मामले रहे. ऐसे में एमएमआर में 77 फीसदी की गिरावट आई है.

यूनिसेफ ने की थी तारीफ
प्रसव के दौरान होने वाली मृत्युदर में जबरदस्त कमी पर यूनिसेफ की भारत में राष्ट्रीय प्रतिनिधि यास्मीन अली हक ने इसकी सराहना करते हुए कहा कि भारत ने इसमें शानदार सफलता पाई है. उन्होंने कहा कि अब 2013 की तुलना में हर प्रसव संबंधित जटिलताओं के कारण लगभग 1000 कम मांओं की मृत्यु होती है.