लखनऊ: 20 जून को सिर पर सेहरा बंधना था. 15 जून को तिलक था. कुछ दिन पहले ही बेटे ने फोन पर बात करते हुए वादा किया था कि वह 10 जून को घर आएगा, इन वादों और तैयारियों के बीच सरहद से बेटे का पार्थिव शरीर तिरंगे से लिपटकर पहुंचा तो मानो आसमान ही टूट पड़ा. शादी के छप चुके कार्ड घर के आंगन में बिखरने के साथ ही खुशियां भी बिखर गईं. सिर्फ इस घर में नहीं, शहीद हुए जवान को जिस घर के दरवाजे पर दूल्हा बनकर जाना था, वहां भी मंगेतर और अन्य परिजनों के सपने भी तार-तार हो गए. जिसे कुछ दिन बाद दुल्हन बनना था, उसका रो-रोकर बुरा हाल है. शहीद का पैतृक गांव व आसपास के कई गाँवों में मातम का माहौल है.

शनिवार को जम्मू-कश्मीर के अखनूर में शहीद हुए विजय
सरहद पर शहादत का गर्व होता ही है, लेकिन परिवार के लिए ये खबर मातम भी लाती है. यूपी के फतेहपुर जिले के सठिगवां गांव के रहने वाले विजय कुमार पांडेय बीएसएफ के जवान थे. वह जम्मू कश्मीर के अखनूर सेक्टर के परगवाल इलाके में सरहद पर तैनात थे. रविवार को देर रात पाकिस्तान की ओर से फायरिंग में उनको गोली लग गई. उन्हें घायल अवस्था में अस्पताल में ले जाया, लेकिन जान नहीं बची. आज उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव लाया गया. यहां पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किए जाने की तैयारी चल रही है.

 

विजय को अंतिम सलाम करने लोग उमड़ पड़े. विजय की शादी का कार्ड.

विजय को अंतिम सलाम करने लोग उमड़ पड़े. विजय की शादी का कार्ड.

 

20 जून को थी शादी, कार्ड बांटने को आने का किया था वादा
कुछ दिन बाद 20 जून को विजय कुमार पांडेय की शादी थी. शादी पास के ही बुढ़वा गांव की वंदना से होनी थी. 15 जून को तिलक था. घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं. शादी के कार्ड छप चुके थे. घर में कोई काम देखने वाला नहीं था. विजय ने फ़ोन पर शनिवार (2 जून) को पिता कृष्ण कुमार पांडे से कहा था कि वह जल्दी घर आएगा. शादी के कामकाज खुद संभालेगा. सब ठीक हो जाएगा, दरअसल, पिता को चिंता थी कि घर में कोई और जिम्मेदार नहीं है, ऐसे में विजय की शादी से पहले के काम कैसे पूरे होंगे. कार्ड भी बांटे जाने थे. चिंता जताने पर विजय ने उन्हें परेशान नहीं होने को आश्वस्त कर 10 जून को आने का वादा किया था.

शहादत को सलाम करने पहुंच रहे सैकड़ों लोग
पूरे गांव में मातम छाया हुआ है. हर किसी की आंखें ये सोच कर नम हैं कि जिसके सिर कुछ दिन बाद सेहरा बंधना था. घर में शहनाई गूंजनी थी, वहां मातम है. और सिर पर सेहरे की बजाय शरीर तिरंगे से लिपटा हुआ था. आसपास के कई गांवों की महिलाएं और पुरुष सैकड़ों की संख्या में देश के लिए खुद को कुर्बान करने वाले शहीद विजय की शहादत को नम आंखों से सलाम करने पहुंचे हैं.