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यूपी उपचुनाव में बीजेपी ने 'ब्राह्मण-कुर्मी' पर खेला दांव, क्या है पार्टी की रणनीति?
योगी आदित्यनाथ के इस्तीफे से खाली हुई गोरखपुर सीट पर उपेंद्र शुक्ला चुनाव लड़ेंगे जबकि केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे से खाली हुई सीट फूलपुर में केएस पटेल को टिकट दिया गया है...
लखनऊ. यूपी के दो अहम लोकसभा सीटों के उपचुनाव के लिए बीजेपी ने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है. योगी आदित्यनाथ के इस्तीफे से खाली हुई गोरखपुर सीट पर उपेंद्र शुक्ला चुनाव लड़ेंगे जबकि केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे से खाली हुई सीट फूलपुर में केएस पटेल को टिकट दिया गया है. उपेंद्र शुक्ला गोरखपुर क्षेत्र में बीजेपी के प्रमुख थे और ब्राह्मण चेहरा हैं. वहीं, केएस पटेल को टिकट मिलने की अहम वजह फूलपुर में कुर्मी वोटर्स की बड़ी संख्या का होना है. पटेल वोटबैंक को देखते हुए बीजेपी को पिछड़ा चेहरा फूलपुर में उतारा है.
1989 से ही गोरखपुर संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व गोरक्षपीठ करती रही है. योगी आदित्यनाथ के गुरू महंत अवैद्यनाथ ने हिंदू महासभा के कैंडिडेट के तौर पर 1989 में यह सीट जीती थी. इसके बाद अवैद्यनाथ ने 1991, 1996 में बीजेपी कैंडिडेट के रूप में गोरखपुर सीट का संसद में प्रतिनिधित्व किया. आदित्यनाथ पहली बार 1998 में इस सीट से सांसद बने, इसके बाद 1999, 2004, 2009 और 2014 में भी इसी सीट से सांसद चुने गए. गोरखपुर सीट से ब्राह्मण चेहरे का चयन राज्य में ब्राह्मण वोट बैंक को संदेश देने की कोशिश भी है.
बीजेपी परंपरागत रूप से ब्राह्मणों की पसंद मानी जाने वाली पार्टी रही है. एक मुख्यमंत्री की संसदीय सीट से किसी चेहरे को उतारकर पूरे राज्य में उसका संदेश जाना स्वाभाविक है. क्षेत्र के प्रमुख के तौर पर शुक्ला ब्राह्मण वोटर्स में खासे जाने पहचाने चेहरे के रूप में रहे हैं. शुक्ला कई वर्षों से बीजेपी में हैं और उन्होंने विधानसभा चुनाव का टिकट हासिल करने की भी पुरजोर कोशिश की थी, हालांकि उन्हें टिकट नहीं मिल सका था.
दूसरी तरफ फूलपूर एक तगड़े मुकाबले का गवाह बनने जा रही सीट बन चुका है. बीजेपी के केएस पटेल (कौशलेंद्र सिंह पटेल) के सामने समाजवादी के नागेंद्र सिंह पटेल चुनावी मैदान में हैं. पटेल बनाम पटेल की इस लड़ाई में जीत उसी के हाथ लगेगी जिसकी पकड़ कुर्मी समुदाय में मजबूत होगी. बता दें कि इससे पहले इस सीट से सांसद रहे केशव प्रसाद मौर्य भी पिछड़े तबके से आते हैं. पेशे से कारोबारी उपेंद्र सिंह पटेल 2006 से 2012 तक वाराणसी के मेयर रह चुके हैं. उन्होंने बीएचयू से कॉमर्स में मास्टर्स की डिग्री हासिल की हुई है.
बिहार में क्या है बीजेपी की रणनीति?
बीजेपी ने पूर्व सांसद प्रदीप सिंह को अररिया लोकसभा सीट से टिकट दिया है. ये सीट आरजेडी सांसद तसलीमुद्दीन के निधन से खाली हुई है. तसलीमुद्दीन के बेटे सरफराज को आरजेडी का टिकट मिलने की पूरी संभावना है. सरफराज ने 2015 में जेडीयू के टिकट पर विधानसभा का चुनाव जीता था. तब जेडीयू और आरजेडी सहयोगी दल थे. बीजेपी नेताओं का दावा है कि जेडीयू और बीजेपी के नए गठजोड़ से दोनों दलों के वोट साथ आएंगे और पार्टी को जीत मिलेगी. पार्टी अपनी बात को मजबूत करने के लिए 2005 और फिर उसके बाद के विधानसभा चुनावों को भी हवाला दे रहे हैं जिसमें पार्टी ने जेडीयू के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर भी जीत हासिल की थी.
सिंह ने 2009 का लोकसभा चुनाव अररिया से जीता था लेकिन 2014 में मोदी लहर के बावजूद तसलीमुद्दीन ने उन्हें शिकस्त दे डाली. वहीं दूसरी तरफ भभुआ विधानसभा सीट पर बीजेपी ने दिवंगत विधायक मोहन पांडे की पत्नी रिंकी पांडे को टिकट दिया है. बीजेपी की नजर सहानुभूति वोट पर है. गठबंधन के सहयोगी के रूप में जेडीयू को जहानाबाद संसदीय सीट मिली है.
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