लखनऊ: कांग्रेस नेता प्र‍ियंका गांधी के प्रवासी मजदूरों के लिए बसें भेजने की सियासत के बीच एक दिन पहले बुधवार को आगरा में गिरफ्तार किया गया था, बुधवार को लखनऊ पुलिस द्वारा धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज के मामले में गिरफ्तार किए गए उत्तरप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है. Also Read - UP: हेड कांस्टेबल ने उठाया खौफनाक कदम, पत्‍नी की हत्‍या की, चलती ट्रेन के सामने कूदकर की सुसाइड

कांग्रेस प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने बताया कि बुधवार देर रात लल्लू को लखनऊ लाया गया और उनका मेडिकल टेस्‍ट भी कराया गया. बाद में उन्हें मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया गया और उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. Also Read - Corona Pandemic: PM मोदी ने 4 राज्‍यों के मुख्यमंत्रियों से कोविड-19 की स्थिति पर की बात

अवस्थी ने बताया कि कल देर रात लल्लू को अस्थायी जेल में रखा गया था. कोरोना वायरस की रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि नहीं होने के बाद उन्हें लखनऊ जेल भेज दिया गया. Also Read - 21 मई से उत्तर प्रदेश के सभी राशन कार्ड धारकों को मिलेगा मुफ्त राशन, नहीं दिया जाएगा चना

लल्लू को आगरा की एक अदालत ने बुधवार को अंतरिम जमानत दे दी थी और उन्हें 20 हजार रुपए के निजी मुचलके पर रिहा कर दिया था, लेकिन लखनऊ पुलिस की टीम ने एक मामले में उन्हें दोबारा गिरफ्तार कर लिया था. उत्तर प्रदेश कांग्रेस के मीडिया संयोजक लल्लन कुमार ने बताया था कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को एक स्थानीय अदालत ने बुधवार दोपहर जमानत देकर रिहा कर दिया था.

लल्लन कुमार ने बताया था कि इसके तुरंत बाद ही लखनऊ पुलिस की टीम ने राजधानी के हजरतगंज थाने में मंगलवार दर्ज एक मामले के सिलसिले में प्रदेश अध्यक्ष को गिरफ्तार कर लिया था. लल्लू को मंगलवार आगरा में गिरफ्तार किया गया था क्योंकि बसों को उत्तर प्रदेश में प्रवेश की अनुमति नहीं दिए जाने के विरोध में वह धरने पर बैठ गए थे.

आगरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार ने कहा था कि अजय कुमार लल्लू के खिलाफ फतेहपुर सीकरी थाने में आईपीसी एवं महामारी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. उन्हें मंगलवार शाम को गिरफ्तार किया गया. कांग्रेस प्रदेश अध्‍यक्ष समेत अन्य कांग्रेस नेताओं के साथ पुलिस लाइन में रखा गया था.

मंगलवार रात को लल्लू और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के निजी सचिव तथा अन्य के खिलाफ हजरतगंज थाने में धोखाधडी और फर्जी दस्तावेज पेश करने से संबंधित आईपीसी की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी.