लखनऊ: आम जनता के लिए पुराने नोट इतिहास हो गए हैं. उनके पास एक दो नोट हों तो उन्हें अब कोई बैंक नहीं बदलेगा, लेकिन सच्चाई यह है कि पुराने नोट अभी भी बदले जा रहे हैं. करीब डेढ़ साल बाद भी काले को सफेद बनाने का काम जारी है. लखनऊ में पुलिस ने 50 लाख पुरानी करेंसी के साथ चार लोगों को अरेस्ट किया है. ये लोग पुराने नोट नेपाल में जाकर बदलने वाले थे. यहां से उन्हें 1 करोड़ के बदले 14 लाख रुपए और 50 लाख के बदले सात लाख रुपए मिलते थे. बाद में पुरानी करेंसी को लखनऊ में एक बैंक के असिस्टेंट मैनेजर की सांठगांठ से बदल दिया जाता था. Also Read - चीन ने कई जगहों पर नेपाल की जमीन पर अवैध कब्जा किया, भारतीय खुफिया एजेंसियां सतर्क

क्राइम ब्रांच की टीम ने किया अरेस्ट
ये चौंकाने वाला खुलासा लखनऊ में हुआ है. शनिवार की शाम लखनऊ क्राइम ब्रांच व पुलिस ने हजरत गंज से चार लोगों को अरेस्ट किया. इनके पास से 50 लाख की पुरानी करेंसी बरामद हुई. राजेश कुमार गौतम, कृष्णा कुमार, सुमित वर्मा अमर नाथ यादव नाम के चार लोगों को स्विफ्ट कार से नोटों के साथ पकड़ा. सभी एक हजार व 500 के नोट थे. ये लोग पुरानी करेंसी को नेपाल पहुंचाने वाले थे. इसका इन्हें कमीशन मिलने वाला था. Also Read - RAW प्रमुख से मिले नेपाल के प्रधामनंत्री केपी शर्मा ओली, शुरू हुआ 'विवाद'

इस तरह से अब तक बदले जा रहे थे नोट
पकडे गए लोगों ने जो खुलासा किया वो चौंकाने वाला है. इन्होंने बताया कि नेपाल में पुरानी करेंसी पहुंचाने का उन्हें कमीशन मिलता था. एक करोड़ पर 14 लाख व 50 लाख पर 7 लाख रुपए मिलते थे. बदले में उन्हें नए भारतीय रुपए मिल जाते थे. सवाल ये है कि नेपाल में पुराणी करेंसी का क्या होता है, इसका जवाब भी चौंकाने वाला है. पकड़े गए अपराधियों के अनुसार, पुरानी करेंसी अब तक बदली जा रही है. यूपी को-ऑपरेटिव बैंक के लखनऊ मुख्यालय में एक असिस्टेंट मैनेजर सतीश वर्मा की मदद से ऐसा हो रहा था. बैंक में सांठगांठ से नेपाल भेजी गई पुरानी करेंसी को धीरे-धीरे बदल लिया जाता था. अपराधियों ने बताया कि अगर उन्होंने 50 लाख रुपए दिए तो उन्हें इसके बदले सात लाख रुपए मिल जाते थे, ये 50 लाख की पूरी करेंसी धीरे धीरे नई करेंसी में तब्दील हो जाती, इस तरह से 14 लाख के बदले में 50 लाख बन जाते. ऐसा कई बार किया जा चुका था.

पूछताछ जारी
क्राइम ब्रांच टीम ने बताया कि बैंकों से सांठगांठ के चलते ऐसा हो रहा था. पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है. इसमें कई और लोग शामिल हो सकते हैं. क्राइम ब्रांच की टीम अभी और समझने की कोशिश में है कि नोट बंदी के डेढ़ साल बाद भी ये सब कैसे किया जा रहा था.