लखनऊ: गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पिछले साल ऑक्सीजन की कथित कमी से बड़ी संख्या में बच्चों की मौत के मामले में नौ आरोपियों में से एक डॉ. कफील खान केरल के कोझीकोड में निपाह वायरस से प्रभावित मरीजों के लिए कार्य करेंगे. उन्होंने केरल में निपाह वायरस से प्रभावित मरीजों के लिए कार्य करने की इच्छा व्यक्त की थी और इसके लिए केरल के मुख्यमंत्री को ट्वीट कर आग्रह किया था. मुख्यमंत्री ने उनके आग्रह को स्वीकार कर लिया है. गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के मामले में सात माह जेल में रहे डॉ. कफील खान को पिछले माह 28 अप्रैल को ही जमानत मिली थी. Also Read - दिल्ली-NCR के साथ रोहतक में भी हिली धरती, घरों से बाहर निकल आए लोग, यूपी के कई इलाकों में जोरदार आंधी-पानी

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डॉ. कफील ने बताया कि उनके ठहरने की व्यवस्था केरल सरकार करेगी. ‘मुझे खुशी है कि वहां कार्य करने का मौका मिल रहा है.’ बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पिछले साल अगस्त में बड़ी संख्या में बच्चों की मौत के बाद कफील सात महीने जेल में रहे. उन्होंने कहा, ‘मैं जब जेल में था, तो केरल के लोगों ने सोशल मीडिया पर मुझे समर्थन दिया था और जेल से निकलने के बाद मैं तीन दिन केरल में रहा.’

निपाह वायरस से अब तक 10 की मौत, मरने से पहले नर्स लिनी का लिखा भावुक लेटर वायरल

केरल में मुसीबत बना है निपाह वायरस

निपाह वायरस के कारण उत्तरी केरल के कोझिकोड़ और मलप्पुरम जिलों में अब तक दस लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दो लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है. स्वास्थ्य मंत्री के के शैलजा ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को केरल में वायरस फैलने के बारे में सूचित किया गया है. राजन और अशोकन नाम के दो व्यक्तियों का कोझिकोड़ में इलाज चल रहा था. उनकी आज सुबह मृत्यु हो गई. उनके वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है.

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नर्स की वायरस के संपर्क में आने से हुई मौत

नर्सिंग सहायक 28 वर्षीय लिनी की भी इस वायरस के संपर्क में आने के कारण सोमवार को मौत हो गई. वायरस संक्रमण के परीक्षण के लिए 18 नमूने भेजे गए थे जिनमें से 12 में संक्रमण की पुष्टि हुई. इनमें से दस लोगों की मौत हो गई. मलप्पुरम में 20 मई को सिंधु और सिजिता की मृत्यु हुई थी. उनके भी निपाह वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है. लिनी ने मौत से कुछ मिनट पहले एक भावुक पत्र लिखा, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. वायरस फैलने के अंदेशे के कारण लिनी के परिजन उनके शव को देख भी नहीं सके. उनका अंतिम संस्कार प्राधिकार की ओर से ही किया गया.

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गोरखपुर में हुई थी 30 बच्चों की मौत, इस मामले में आरोपी हैं डॉ. कफील

बता दें कि गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के इंसेफेलाइटिस वॉर्ड में 10 अगस्त, 2017 को बच्चों की मौत हुई थी. इसी मामले में डॉ. कफील पर कार्रवाई की गई थी. 10 अगस्त को वार्ड में अचानक बच्चों की मौत होने लगी थी. बच्चों की मौत ऑक्सीजन सिलिंडर खत्म होने से शुरू हुई. ऑक्सीजन गैस सिलिंडर की कमी से अस्पताल में हुई 30 बच्चों की मौत ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. इस घटना की अगली सुबह ही अस्पताल के डॉ. कफील खान का नाम एक हीरो की तरह सामने आया, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने अपने परिचित डॉक्टर दोस्तों और उनकी अस्पतालों से रात में ऑक्सीजन सिलिंडर मंगवाए और बच्चों के इलाज को जारी रखा. उन्होंने बच्चों को बचाने के लिए काफी संघर्ष किया, लेकिन बाद में इस मामले में डॉ. कफील को ही दोषी माना गया. उन्हें 28 अप्रैल, 2018 को ही जमानत मिली थी.