आगरा: जम्मू कश्मीर में शहीद हुए आगरा के रहने वाले बीएसएफ जवान का पार्थिव शरीर उनके गांव लाया गया. पार्थिव शरीर घर पहुंचने के बाद लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े. पत्नी, बच्चों और पिता का करुण क्रंदन देख हर किसी की आंखें नम हो गईं. वहीं, परिवार और गांव के लोगों ने शहीद का पार्थिव शहीद हाईवे पर रखकर जाम लगा दिया. पार्थिव शरीर को लेकर धरने पर बैठे लोगों की मांग है कि प्रशासन ने जवान के 15 मई, 2018 को शहीद होने की खबर के बाद शहीद की प्रतिमा लगवाने का वादा किया था. इसके लिए जमीन देने की बात कही थी, लेकिन इसके लिए कुछ नहीं किया. ये शहीद जवान की बेइज्जती है. इससे गुस्साए परिवार व गांव के लोगों ने जाम लगा दिया. Also Read - Check PMAYG 2021 Beneficiary List: प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2691 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी करेंगे पीएम मोदी, जानिए कैसे लें इस योजना का लाभ

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यहां पहुंचीं बीजेपी विधायक हेमलता दिवाकर ने कहा कि ‘हमने परिवार से वादा किया है. ये मेरी जिम्मेदारी है, लेकिन परिवार के लोग चाहते हैं कि तत्काल ही प्रतिमा लगे. ऐसा संभव नहीं है. मैं इस बारे में सीएम से पत्र लिखूंगी और उनसे व्यक्तिगत तौर पर मिलूंगी भी.’

परिवार के लोगों ने तुरंत ही प्रतिमा लगवाने की मांग की. जवान का फाइल फोटो. फोटो. एएनआई

परिवार के लोगों ने तुरंत ही प्रतिमा लगवाने की मांग की. जवान का फाइल फोटो. फोटो. एएनआई

हीरानगर में थे तैनात, घुसपैठियों को कर रहे थे सर्च

बता दें कि जम्मू के कठुआ जिले के हीरानगर में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर देश की रक्षा में तैनात जवान देवेंद्र शहीद हो गए. देवेंद्र सीमा सुरक्षा बल की 173वीं बटालियन का हिस्सा थे और आतंकी घुसपैठ के बाद चल रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान गोली लगने से घायल हो गए थे. वह आगरा के थाना सिकंदरा के लखनपुर गांव के रहने वाले थे. उनका परिवार इसी गांव में रहता है. बीते दिन पाकिस्‍तान ने जम्‍मू एवं कश्‍मीर के सांबा सेक्‍टर में संघर्ष विराम का उल्‍लंघन करते हुए गोलीबारी की, बीएसएफ ने भी भारी गोलीबारी करते हुए पाकिस्‍तान रेंजर्स को जवाब दिया. इसी गोलाबारी में बीएसएफ का एक जवान शहीद हो गया. जवान की शहादत की खबर आने के बाद पूरे गांव में मातम का माहौल है. देवेंद्र के कंधों पर पत्नी और दो बच्चों के साथ बीमार पिता की भी जिम्मेदारी थी, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने अपने देश की परवाह ज्यादा की.

कंधों पर थी पत्नी, दो बच्चों और बीमार पिता की जिम्मेदारी, फिर भी देश की परवाह में शहीद हो गया जाबांज

पिता बोले- बेटे की शहादत पर गर्व

परिवार को बेटे के शहीद होने पर दुख हैं, लेकिन इस बात का गर्व है कि उसने अपने प्राणों को भारत मां के लिए न्यौछावर किए. बीमार पिता ने कहा, कि मुझे दुख है कि मेरा बेटा अब इस दुनिया में नहीं है. वो हमारे साथ नहीं है, लेकिन मुझ सहित पूरे परिवार को इस बात का गर्व है कि उसने देश के लिए अपने प्राणों को हंसते-हंसते न्यौछावर कर दिए.