लखनऊ: उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरने पर बैठे किसान नेता की मौत हो जाने से प्रशासन में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में धरना स्थल से बैनर पोस्टर हटा दिए गए. धरने पर बैठे अन्य पदाधिकारियों ने इस मौत का जिम्मेदार जिला प्रशासन को बताया है. उन्‍होंने मृतक के परिजनों को मुआवजा देने की मांग की है.

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जानकारी के मुताबिक, किसान अमृत लाल सविता कई दिनों से रायबरेली में जिलाधिकारी कार्यालय के सामने अपने साथियों के साथ धरना दे रहा था. बीती रात अमृत लाल सविता कलेक्ट्रेट से जिला अस्पताल मृत अवस्था में पहुंचे तो प्रशासन के हाथ पांव फूल गए. सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि किसान अपनी सात सूत्री मांगों को लेकर धरने पर बैठा था, जिसमें से कुछ मांगों का निस्तारण हो गया था और कुछ के लिए एसडीएम डलमऊ की अमृत लाल सविता की वार्ता चल रही थी लेकिन इसी बीच इनकी बीती रात में मौत हो गई.

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मृतक के परिजनों के लिए मांगा 50 लाख का मुआवजा
इस पूरे मामले में किसान कल्याण एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मृतक और अमृत लाल के साथियों ने विकास भवन में जमकर नारेबाजी की. संघ ने इस मौत का जिम्मेदार जिला प्रशासन को ठहराते हुए मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपए का मुआवजा और एक परिजन को नौकरी देने की मांग की है. (इनपुट-एजेंसी)