अंबेडकरनगर: अब तक इंसानों को किसी अपराध पर सजा-ए-मौत का फरमान सुनाया जाता रहा है, लेकिन इस बार बेजुबान घोड़ों को मौत की सजा देने का ऐलान किया गया. और तय समय से पहले ही उनकी जान ले ली गई. घोड़ों को जेसीबी द्वारा गड्ढा खुदवाकर दफना दिया गया. मारने से पहले घोड़ों को बेहोशी न इंजेक्शन नहीं दिया गया. तड़प-तड़प कर घोड़ों की जान चली गई. Also Read - Driving License Latest Update: अब चुटकियों में बन जाएगा ड्राइविंग लाइसेंस, बदल गए हैं नियम, जानिए

इसलिए घोड़ों को दी गई मौत
दरअसल, जिन चार घोड़ों की जान ली गई, उन्हें ग्लैंडर्स फार्सी नामक घातक बीमारी थी.
कड़ी सुरक्षा के बीच इन्हें नदी के तट पर जेसीबी मशीन से गहरे गड्ढे में दफन भी कर दिया गया. बता दें कि लगभग एक माह पूर्व पशुपालन विभाग ने जिले में बीस घोड़ों के खून के सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान प्रयोगशाला हिसार हरियाणा में भेजा था. जांच में दो घोड़े एक घोड़ी व एक खच्चर में ग्लैंडर्स की पुष्टि होने के बाद विभाग में सनसनी फैल गई. इस संक्रामक बीमारी को कोई इलाज न होने के कारण प्रभावित घोड़ों को मौत के आगोश में पहुँचाना ही एकमात्र विकल्प था. Also Read - शर्मनाक: नशे में धुत बड़े भाई ने शादीशुदा बहन के साथ किया Rape, वीडियो भी बनाया

24 घंटे पहले दे दी गई मौत
पहले इन घोड़ों को सजा-ए-मौत देने के लिए सोमवार का दिन चुना गया था, लेकिन शनिवार को ही इन्हें मारने का फैसला किया गया. उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी संजय शर्मा की अगुवाई में गए चिकित्सकों व उनकी टीम ने सभी घोड़ों को सजा-ए-मौत दे दी. Also Read - UP: घर से लड़की के लापता होते ही आया था फोन- वीडियो कर देंगे वायरल, फ‍ि‍र रेलवे पटरी के पास मिली लाश

यह है बीमारी के लक्षण
घोड़ों को इसलिए भी मार दिया गया क्योंकि घोड़ों से होते हुए ये बीमारी पशुओं से मनुष्यों में फैल सकती है. इस बीमारी के लक्षण पशुओं के त्वचा में फोड़े व घुमडिय़ां निकलना, नाक के अंदर से फटे हुए छाले दिखना, तेज बुखार, नाक से पीला कनार स्राव आना व सांस लेने में तकलीफ आदि शामिल है.