बीजेपी के सांसदों और पदाधिकारियों के बीच तालमेल में कमी रही, इसका असर वोट बैंक पर दिखा.
इसके अलावा बीते 6 साल में सरकारी नौकरियों के लीक हुए पेपर मामले भी बीजेपी की हार की वजह बने.
राज्य सरकार में संविदा कर्मियों की भर्ती में सामान्य वर्ग के लोगों को प्राथमिकता मिली, इससे लोगों के मन में आरक्षण खत्म होने का डर सताने लगा.
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इसके अलावा राजपूत समाज भी बीजेपी से नाराज दिखा.
अग्निवीर भी चुनाव का बड़ा मुद्दा बन गया. जिससे की वोट शेटर में कमी देखी गई.
इसके अलावा यूपी में अधिकारियों और प्रशासन की मनमानी की वजह से कार्यकर्ताओं में असंतोष नजर आया.