कैराना: कैराना का ज़िक्र हो तो आमतौर पर करीब दो साल पहले पलायन और जगह-जगह लिखा ‘मकान बिकाऊ है’, की तस्वीरें जेहन में तैर जाती हैं, लेकिन कैराना कभी दुनिया के लिए ‘किराने के तरानों’ की वजह से मशहूर रहा है. कैराना में कुछ साल से हिन्दू-मुस्लिम में तल्खियों के बीच अगर उन तरानों की गूंज सुन ली जाती तो शायद खाई बढ़ नहीं पाती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसीलिए आप आज कैराना के विवादों को तो जानते हैं, लेकिन कैराना में भारतीय शास्त्रीय संगीत के अहम मुकाम रहे ‘किराना घराना’ को नहीं जानते हैं. नकारात्मक ख़बरों की आवाजाही वाला कैराना कभी ऐसा मुकाम रहा है, जिस पर देश के सर्वोच्च और ‘भारत रत्न’ गायकों के तराने गूंजते रहे हैं. Also Read - मामूली घरेलू विवाद में पिता को आया इतना गुस्सा कि दोस्त के साथ तीन बेटियों को नदी के पास ले जाकर....! तलाश जारी

जी हां, कैराना की एक सूरत ऐसी भी है, जिसके पीछे भारतीय शास्त्रीय संगीत के ख़याल गायकी की गर्वित करने वाली तस्वीर है. किराना घराने के नाम से मशहूर इस घराने ने ही पंडित भीमसेन (जिन्हें सर्वोच्च पुरस्कार भारत रत्न मिला है), गजल गायिका बेगम अख्तर और संवई गंधर्व जैसे महान संगीतज्ञ देश और दुनिया को दिए. किराना घराने को भारतीय शास्त्रीय संगीत की सबसे अहम् बुनियाद मानी जाती है. Also Read - Noida: गार्मेंट कंपनी में लगी भीषण आग, एक दर्जन दमकल गाड़ियों को घंटों करनी पड़ी मशक्कत

अब्दुल करीम खान ने रखी थी घराने की नींव
किराना घराने की नींव उस्ताब अब्दुल करीम खान ने रखी थी. अब्दुल करीम खान (1872-1936) का जन्म कैराना में हुआ था. उन्होंने इस घराने के जरिए भारतीय शास्त्रीय संगीत और गायन की हिन्दुस्तानी ख़याल गायकी परंपरा को आगे बढ़ाया. अब्दुल करीम खान बीसवीं सदी के किराना शैली के सर्वाधिक महत्वपूर्ण भारतीय संगीतज्ञ थे. करीम खान के भतीजे अब्दुल वाहिद खान ने इस परम्परा को आगे बढ़ाया. इसके बाद करीम खान के शिष्य सवाई गंधर्व, सुरेश बाबू माने (वाहिद खान के शिष्य), हीराबाई, रोशन आरा बेगम, सरस्वती, गंगूबाई, प्रभा अत्रे, माणिक वर्मा व महान संगीतज्ञ भीमसेन जोशी (जो सवाई गंधर्व के शिष्य रहे) ने घराने को आगे बढ़ाया. भीमसेन जोशी (1922-2011) को भारत रत्न से सम्मानित किया गया. Also Read - 12 साल की बच्‍ची ने बचत के पैसों से प्रवासी मजदूरों को फ्लाइट से झारखंड भेजने का किया इंतजाम

बेगम अख्तरी, मोहम्मद रफ़ी का भी था ताल्लुक
इनके साथ ही केसरबाई और रोशनआरा बेग़म जैसी गायिका भी इसी घराने से थीं. गजल गायिका बेगम अख्तरी, हीराबाई बडोडकर, गंगूबाई हंगल, मोहम्मद रफ़ी जैसे महान गायक भी इस घराने से ताल्लुक़ रखते थे. इसके अलावा इस घराने ने अब्दुल वाहिद, सुरेश बाबू माने, रोशन आरा बेग़म, सरस्वती राणे, माणिक वर्मा जैसे नामी गिरामी संगीतज्ञ भी दिए.

ऐसे पड़ा कैराना का नाम, इन्होंने रखी कैराना की नींव
बताया जाता है कि पौराणिक काल में कैराना कर्णपुरी के नाम से जाना जाता था. कैराना के लोगों का कहना है कि महाभारत काल में कर्ण का जन्म कैराना में हुआ था. ‘कै और राणा’ नाम का एक चौहान गुर्जर था, उसी के नाम पर कैराना का नाम पड़ा. हालांकि ये सिर्फ किवदंतियां हैं, इनका कोई प्रमाणिक आधार नहीं है.

इन वजहों से चर्चा में आया कैराना
कैराना इलाका पूरे पश्चिमी यूपी की तरह गन्ना उत्पादन के लिए जाना जाता है. 2016 में कैराना से बीजेपी के सांसद रहे हुकुम सिंह ने हिन्दुओं के पलायन का मुद्दा उठाया. उनका कहना था कि मुस्लिमों के आतंक के कारण लोग घर छोड़ रहे हैं. इस मुद्दे को लेकर राजनैतिक बवाल मचा था. कैराना की एक अलग तस्वीर सामने आई थी. हिन्दू-मुस्लिम के बीच तल्खियां बढ़ गईं. हालांकि 2017 विधानसभा चुनाव में इस मुद्दे को लेकर हुकुम सिंह ने अपनी बेटी मृगांका सिंह को चुनाव नहीं जिता सके थे. कुछ समय पहले ही हुकुम सिंह के निधन के बाद खाली हुई सीट पर उपचुनाव हुए. उप चुनाव में बीजेपी ने एक बार फिर हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को टिकट दिया था. सपा-आरएलडी की प्रत्याशी तबस्सुम हसन उनके सामने हैं. आज यहां मतगणना हो रही है.