लखनऊ: सब्जी बेचने वाली एक महिला की बेटी डॉक्टर बन गई है. महिला ने मुश्किलों के बीच बेटी को पढ़ाया. महिला अब तक सब्जी की दुकान लगाती है. भाई भी अपनी बहन के लिए सब्जी बेचता है. इलाके के लोगों के लिए महिला और उसका बेटा रोल मॉडल बन चुके हैं. छोटी बेटी भी सीपीएमटी की तैयारी कर रही है. Also Read - यूपी में जगह-जगह बम रखे होने की अफवाह, कई जिलों में धारा 144 लगाई गई, पुलिस सतर्क

सफलता की ये कहानी यूपी के हमीरपुर जिले के मौदहा कस्बे की रहने वाली सुमित्रा और उनकी बेटी अनीता की है. सुमित्रा बताती हैं कि ‘दो बेटे व तीन बेटियां सहित उसके पांच बच्चे हैं. करीब 14 साल पहले मजदूरी करने वाले पति संतोष की मौत हो गई. बच्चों की जिम्मेदारी उन पर आ गई. सबसे बड़ी बेटी अनीता डॉक्टर बनना चाहती थी.’ वह बताती हैं कि ‘मैं पढ़ी लिखी नहीं हूं, लेकिन बेटी को आगे पढ़ाने का निर्णय लिया. अनीता 10वीं में 71 व 12 वीं में 75 प्रतिशत अंकों के साथ पास हुई. अनीता ने स्कूल में टॉप किया. Also Read - UP: Noida में एनकाउंटर में गोंडा के मेडिकल छात्र को ऐसे छुड़ाया, 70 लाख फिरौती की थी मांग

बहन को पढ़ाने के लिए भाई ने फल-सब्जी बेच रुपए भेजे.

बहन को पढ़ाने के लिए भाई ने फल-सब्जी बेच रुपए भेजे.

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जब सीपीएमटी में मिली 682 रैंक, मां बहुत रोई
2013 में कानपुर में एक साल की तैयारी के बाद सीपीएमटी में अनीता का चयन हो गया. अनीता को 682 रैंक मिली. उसे इटावा के सैफई मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिला. एमबीबीएस की पढ़ाई करते हुए उसका पांचवा आखिरी साल है. वह बताती है कि जब उसका चयन हुआ तब उसकी मां और वह बहुत रोई.

मां ने घरों में लगाया झाड़ू-पोंछा, खुद अनीता ने बेची इमली
बेटी के लिए सुमित्रा ने घरों में झाड़ू-पोंछा लगाने का काम किया. बस स्टैंड पर पानी बेचा. अधिक रुपयों के लिए उन्होंने सब्जी की दुकान लगाना शुरू किया. इससे वह 300 से 500 रुपये वह हर रोज कमाने लगी. भाई ने भी बहन को पढ़ाने के लिए सब्जी का ठेला लगाया. सुमित्रा कहती हैं कि एक-एक पाई जोड़ अनीता को रुपए भेजे. अनीता बताती हैं कि हाईस्कूल की पढ़ाई के बीच रुपयों के लिए स्कूल के बाहर इमली और कैथा तक बेचा.

परिवार ने अनीता को पढ़ाने के लिए अपनी इच्छाओं से समझौते किए.

परिवार ने अनीता को पढ़ाने के लिए अपनी इच्छाओं से समझौते किए.

 

छोटी बहन भी बनना चाहती है डॉक्टर
सुमित्रा ने बताया कि छोटी बेटी विनीता भी डाक्टर बनना चाहती है. उसे सीपीएमटी की तैयारी करने के लिये कानपुर भेज दिया गया है. सुमित्रा को भरोसा है कि छोटी भी बड़ी की तरह नाम रोशन करेगी.

‘गरीबों का मुफ्त इलाज करूंगी’
अनीता कहती है कि उसने गरीबी करीब से देखी है. उसके पिता की मौत बीमारी के कारण हुई थी. उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि ठीक से इलाज करा पाते. इसीलिए उसके मन में डॉक्टर बनने की इच्छा थी. मेरी मां और भाइयों के कारण यह सपना आसान हो सका है. वह भविष्य में उन लोगों का मुफ्त इलाज करेगी जो गरीब नहीं होने के कारण हॉस्पिटल की चौखट तक नहीं पहुंच पाते हैं.