मेरठ: केरल के साथ ही अन्य जगहों पर भी निपाह वायरस का खौफ हावी है. मेरठ के कुछ नर्सिंग होम्स और निजी अस्पतालों में काम करने वाली केरल की नर्सों को अपने घर केरल जाने से रोक दिया गया है. नर्स घर जाना चाहती थीं, लेकिन उनकी छुट्टियाँ कैंसिल कर दी गई हैं. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने ये फैसला किया है. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि डर है कि केरल में जाकर नर्स कहीं निपाह वायरस की चपेट में न आ जाएं और वापस आने पर वायरस उनके साथ न आ जाएं. बता दें कि गोरखपुर के डॉ. कफील खान को केरल सरकार ने निपाह वायरस से निपटने के लिए केरल बुलाया है. कफील ने खुद ही इसकी इजाज़त मांगी थी. डॉ. कफील बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई बच्चों की मौतों को लेकर विवादों में रहे थे. उन्हें बच्चों को मौत के मामले में सात माह तक जेल में रहना पड़ा था.Also Read - Delhi CM अरविंद केजरीवाल राम लला के दर्शन के लिए जाएंगे अयोध्‍या

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आईएमए ने कहा- एहतियात नर्सों के लिए ही है

मेरठ में कई ऐसे हॉस्पिटल हैं, जहां केरल की नर्स काम करती हैं. निजी नर्सिंग होम्स व अस्पतालों में भी केरल की नर्स हैं. इनमें से कई नर्स छुट्टी लेकर अपने घर जाना चाहती थी, लेकिन उन्हें घर जाने से रोक दिया गया है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने ये फैसला लिया है. आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. जेवी चिकारा ने कहा कि केरल में फैले निपाह वायरस को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया गया है. ये नर्सों की सुरक्षा के लिए है. नर्स भी इस फैसले पर राजी हो गई हैं.

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केरल में अब तक हो चुकी है 11 की मौत

बता दें कि केरल में निपाह वायरस का खौफ छाया हुआ है. केरल के कोझिकोड और मलप्पुरम जिलों में अबतक इस विषाणु से 11 लोगों की मौत हो चुकी है. कुछ दिन पहले एक नर्स भी इलाज करने के दौरान इस वायरस की चपेट में आ गई थी. इसके बाद से उत्तर प्रदेश में भी अलर्ट किया गया है.

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पीड़ित परिवारों से भेदभाव कर रहे हैं लोग

केरल में पीड़ित परिवारों के साथ भेदभाव किया जा रहा है. वायरस की चपेट में आकर जान गंवाने वाले राजन के परिवार से लोगों ने मिलना जुलना छोड़ दिया है. राजन के परिवार में पत्नी सिंधु, दो बेटियां सांदरा और स्वाति तथा उसकी मां नारायणी हैं. एक रिश्तेदार ने कहा, ‘परिवार बाहर की दुनिया के संपर्क में नहीं है. हम पूरी तरह कट गये हैं. इस घड़ी में कोई भी हमें दिलासा देने नहीं आ रहा है.’ निपाह प्रभावित कई परिवारों ने अलग-थलग किये जाने की शिकायत की है क्योंकि लेागों को इस दुर्लभ विषाणु की चपेट में आ जाने का डर है. यहां तक कि पेराम्बरा तालुक अस्पताल के कर्मचारियों ने भी भेदभाव की शिकायत की है. उन्हें बसों में यात्रा नहीं करने दिया जा रहा है और ऑटो रिक्शा उन्हें उनके कार्यस्थल तक ले जाने से इनकार कर देते हैं. इसका संज्ञान लेते हुए केरल राज्य मानवाधिकार आयोग ने जिला पुलिस प्रमुख और कोझिकोड जिला चिकित्सा अधिकारी से रिपोर्ट मांगी है.