चित्रकूट: बिहार के गया जिले के गहरौली गाँव में जीतन राम दशरथ मांझी को आप भली-भांति जानते होंगे. उन्होंने अपनी पत्नी की याद में 22 साल तक पहाड़ काट कर रास्ता बना दिया था. आज हम आपको ऐसे ही एक और मांझी से मिलाने जा रहे हैं. उत्तर प्रदेश के बुंदलेखंड के जिला चित्रकूट के भारतपुर गांव में भैयाराम हैं, जिन्होंने पहाड़ काट, निर्जीव ज़मीन को जिंदा कर 40 हजार से अधिक पेड़-पौधे सींच वन क्षेत्र में तब्दील कर दिया है. इसके लिए उन्होंने पहाड़ तक काट दिए. पत्नी और बेटे के वियोग में ऐसा करने वाले भैयाराम को दूसरा दशरथ मांझी  कहा जाने लगा है. कई लोग उन्हें ‘पर्यावरण पिता’ कहते हैं. भैयाराम का कहना है कि पेड़ पौधों से वह बातें करते हैं. पेड़-पौधे उनकी बात ईश्वर तक पहुंचाते हैं. Also Read - UP News: आजमगढ़ में चार सीट वाला प्रशिक्षु विमान दुर्घटनाग्रस्त, पायलट की मौत

मुश्किलों ने दी प्रेरणा, पहाड़ काट कर लगाए पेड़
जीतनराम मांझी की तरह ही भैयाराम ने अपनी पत्नी और बच्चे की याद में 40 हजार से अधिक पेड़ लगा डाले. भैयाराम की पत्नी की मौत 2001 में बेटे को जन्म देने के दौरान हो गई थी. पत्नी की मौत हो गई, लेकिन जन्मे नवजात शिशु की जिम्मेदारी उन पर आ गई. पत्नी वियोग ने उन्हें एक तरह से वैरागी बना दिया. इसी दौरान उनका रुझान बंजर जमीन पर पेड़ लगाने की ओर बढ़ा. वह ऐसा करने भी लगे. बंजर ज़मीन को समतल करने की कोशिश की. इसी बीच नवजात बेटा जिसे भैयाराम ने पाला पोषा, वह सात साल का हो गया, लेकिन 2008 में 7 साल की उम्र में बेटा भी बीमारी के चलते चल बसा. पत्नी के बाद बेटे की मौत से आहत भैयाराम ने घरवार छोड़ दिया. और उन्होंने खुद को पूरी तरह से पर्यावरण को समर्पित कर दिया. Also Read - UP: स्‍टोन व्यवसायी के मर्डर से जुड़े 5 ऑडियो लीक, IPS, IAS और नेताओं के Nexus का खुलासा

भैयाराम ने लोगों के लिए संदेश भी लिख रखा है.

भैयाराम ने लोगों के लिए संदेश भी लिख रखा है.

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अकेलेपन के साथी हैं 40 हजार से अधिक पेड़-पौधे
2008 से भैयाराम ने खुद को पूरी तरह से पर्यावरण को सहेजने में लगा दिया. उन्होंने बंजर जमीन को बेहतर बनाने के लिए बीच में आने वाली छोटी-छोटी पहाड़ियों को भी काट दिया. और पौध लगाना शुरू किया. उन्होंने 50 हेक्टेयर से अधिक बंजर इलाके को वन क्षेत्र में तब्दील कर दिया. इस समय उनके वन क्षेत्र में 40 हजार पेड़ लगे हुए हैं. वन विभाग ने उनकी मदद की और हज़ारों पौधे उन्हें दिए, जो बड़े हो चुके हैं. पेड़ों को ही अपना परिवार मानने वाले 52 साल के भैयाराम कहते हैं कि मुझे पर्यावरण और इन पेड़ों ने जीने का मकसद दिया है. पेड़-पौधे और उनका वन इलाका उनके अकेलेपन के साथी हैं. वह इनसे बातें करते हैं. उनका मानना है कि वन के पेड़ उनकी बात सुनते हैं और उनका संदेश ईश्वर तक पहुंचाते हैं.

पेड़-पौधों को मानने लगे परिवार
भैयाराम बताते हैं कि पत्नी फिर बेटे की मौत से वह टूट गए. उन्होंने घर छोड़ जंगल में झोपड़ी बनाई और यहीं रहकर अपने वन इलाके में रहकर इसकी देख-रेख शुरू कर दी. पेड़-पौधों की गुड़ाई-निराई के साथ ही भैयाराम द्वारा सिंचाई तक का पूरा ख्याल रखा जाता है. भैयाराम के मुताबिक़ ये पेड़ ही मेरे बेटे हैं. आज की तारीख में मेरे लिए इनसे बढ़कर कोई नहीं. मेरे रात दिन इनके साथ ही गुजरता है. लोगों को इससे हवा साफ मिलती है. पर्यावरण साफ होता है. यही सबसे बड़ी उपलब्धि है.

भैयाराम ने 50 हेक्टेयर बंजर जमीन को हरा भरा बना दिया.

भैयाराम ने 50 हेक्टेयर बंजर जमीन को हरा भरा बना दिया.

 

मिलने पहुंचते हैं लोग
वन इलाके के रेंजर सहित कई लोग उनसे अक्सर भैयाराम से मिलने पहुंचते हैं. गाँव के राम भरोसे बताते हैं कि वह भैयाराम के संकल्प को देखकर हैरान थे, लेकिन उन्होंने कर दिखाया. यह ईश्वर का बड़ा करिश्मा और दया है, जिसकी छाया भैयाराम पर पड़ी. लोग कहते हैं कि भागदौड़ भरी जिंदगी में पर्यावरण की परवाह किसे हैं. सब खुद को बेहतर बनाने में लगे हुए हैं. साफ हवा के बिना लोग अच्छी जिंदगी चाहते हैं, लेकिन ऐसा संभव कहां है. भैयाराम लोगों के लिए उदाहरण हैं.