लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों एवं विधायकों की नाराजगी दूर करने के उद्देश्य से संवाद की पहल की थी, लेकिन अब सूबे के अधिकारी ही उनके इस अभियान को चौपट करने में जुटे हुए हैं. Also Read - Uttar Pradesh Diwas: सीएम योगी ने कहा- यूपी के प्रति बदली देश की भावना, दूसरे राज्य भी अपना रहे हमारे प्रदेश का मॉडल

Also Read - UP: मेडिकल छात्र को आई लड़की की कॉल, मिलने गया तो हुआ अपहरण, डॉक्‍टर प‍िता से 70 लाख फिरौती मांगी

सूत्रों के मुताबिक भाजपा के सांसदों एवं विधायकों ने मुख्यमंत्री को जो काम बताए थे, उन्हें विभागों से रिपोर्ट के लिए भेजा गया था. लेकिन विभागीय अधिकारी रिपोर्ट देने की जगह चुप्पी साधकर बैठ हुए हैं. गौरतलब है कि भाजपा के सांसद और विधायक लगातार शिकायत कर रहे थे कि उनके काम नहीं हो रहे हैं. चुनाव में स्थानीय स्तर पर किए गए वादों और जनहित से जुड़े तमाम जरूरी काम तक के लिए नीचे के अधिकारी नहीं सुन रहे. उनकी चिंता एक साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर है, जिसमें उन्हें फिर से जनता के बीच जाना है. Also Read - UP: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, शादीशुदा का दूसरे से रिश्‍ता अपराध है, यह ‘लिव इन रिलेशन’ भी नहीं

UP: कैबिनेट मंत्री राजभर ने कहा, छोटी जाति के कारण उनकी नहीं सुनते अफसर

सात-आठ छोटे विभागों को छोड़ ज्यादातर ने नहीं दिया कोई जवाब

मुख्यमंत्री योगी ने इसके बाद संसदीय क्षेत्रवार सांसदों व विधायकों से मुलाकात की और उनसे सरकार के कामकाज का फीडबैक लिया और प्राथमिकता पर कार्रवाई का आश्वासन दिया. शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्यमंत्री सचिवालय ने मार्च में प्रत्येक सांसद और विधायक के प्रस्तावों को संबंधित विभागों को भेजा था. यह रिपोर्ट 24 मार्च तक मुख्यमंत्री को भेजी जानी थी, लेकिन सात-आठ छोटे विभागों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर ने कोई जवाब नहीं दिया है. (इनपुट एजेंसी)