लखनऊ: उत्तर प्रदेश संपत्ति विभाग ने सूबे के पूर्व मुख्यमंत्रियों को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर सरकारी बंगला खाली करने को कहा है. इसमें मुलायम सिंह यादव, कल्याण सिंह, अखिलेश यादव, मायावती, नारायण दत्त तिवारी और राजनाथ सिंह को नोटिस जारी हुए हैं. बता दें कि बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार के उस कानून को रद्द कर दिया था, जिसके तहत प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगला देने का प्रावधान किया गया था. Also Read - यूपी: क्या फिर से अखिलेश के साथ आएंगे शिवपाल सिंह यादव, सपा के वरिष्ठ नेता ने दिया ये बड़ा संकेत

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बुधवार को इसी प्रकरण को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने मौजूदा मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात भी की थी. इसके बावजूद अचानक नोटिस जारी होने को लेकर सियासी गलियारे में चर्चा तेज हो गई है. वर्तमान समय में यहां छह पूर्व मुख्यमंत्रियों के पास लखनऊ, हजरतगंज के पॉश इलाके में कई-कई एकड़ में बड़े-बड़े सरकारी बंगले हैं. इन सरकारी बंगलों में पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से 4- विक्रमादित्य मार्ग पर अखिलेश यादव, 5- विक्रमादित्य मार्ग पर मुलायम सिंह यादव, 13-माल एवेन्यू पर मायावती, 2-मालएवेन्यू पर कल्याण सिंह, 1-माल एवेन्यू पर नारायण दत्त तिवारी और 4-कालीदास मार्ग पर केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के आवास हैं. बता दें कि इन बंगलों के सरकारी रख-रखाव का जिम्‍मा राज्य संपत्ति विभाग के पास होता है. इसके लिए विभाग सालाना बजट भी जारी करता है.

सुप्रीम कोर्ट ने पलटा अखिलेश सरकार का फैसला, पूर्व मुख्‍यमंत्रियों को नहीं मिलेगा सरकारी बंगला

सात मई को सुप्रीम कोर्ट ने दिया था फैसला

बता दें कि सात मई को सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन आवास दिए जाने का नियम रद्द कर दिया था. न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कानून में संशोधन संवैधानिक अधिकार क्षेत्र से बाहर की बात है, क्योंकि यह संविधान के तहत प्रदत्त समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है. पीठ ने कहा था कि एक बार कोई व्यक्ति सार्वजनिक पद छोड़ देता है तो उसमें और आम नागरिक में कोई अंतर नहीं रह जाता. बता दें कि इससे पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास में बने रहने की अनुमति देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कानून में किये गए संशोधन को चुनौती देने वाली गैर सरकारी संगठन की याचिका पर अपना फैसला 19 अप्रैल के सुरक्षित रख लिया था. न्यायालय ने पहले कहा था कि एनजीओ ‘लोक प्रहरी’ ने जिस प्रावधान को चुनौती दी है, अगर उसे अवैध करार दिया जाता है तो अन्य राज्यों में मौजूद समान कानून भी चुनौती की जद में आ जाएंगे.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जारी हुए नोटिस

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगले आवंटित करने के खिलाफ लोकप्रहरी संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका की थी. सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने लोकप्रहरी संस्था की याचिका पर सुनवाई करते हुए 7 मई को राज्य सरकार द्वारा बनाए गए उप्र. मंत्री अधिनियम को अवैध बताते हुए खारिज कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में राज्य सम्पत्ति विभाग ने आज पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगले खाली करने का नोटिस दिया है.