लखनऊ | उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सरकार में खनन मंत्री रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति को आज लखनउ की एक अदालत ने दुष्कर्म के मामले में जमानत दे दी. वहीं उनके साथ जेल में बंद गायत्री प्रजापति के दो साथी पिंटू और विकास को पास्को कोर्ट से जमानत मिली है. गायत्री प्रसाद प्रजापति महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म और महिला की बेटी से छेड़छाड़ के आरोपों के कारण लखनऊ जेल में बंद थे.

पाक्सो न्यायालय के न्यायाधीश ओम प्रकाश मिश्र ने गायत्री प्रजापति और उनके सहभागी विकास वर्मा तथा अमरेन्द्र सिंह उर्फ मिंटू को एक-एक लाख रपये के निजी मुचलके तथा इतनी ही राशि के बांड पर जमानत दे दी. गायत्री प्रजापति को उत्तर प्रदेश पुलिस की टीम ने विधानसभा चुनाव के बाद पिछली 15 मार्च को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था.

यह है पूरा मामला
18 फरवरी को अमेठी से चुनाव लड़े गायत्री प्रजापति व उसके छह साथियों के खिलाफ गौतमपल्ली थाने में रिपोर्ट लिखाई गई थी. यह रिपोर्ट चित्रकूट की एक पीड़िता की तहरीर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लिखी गई थी. पीड़िता ने आरोप लगाया था कि गायत्री के सरकारी आवास पर उन्हें नशीला पदार्थ चाय में पिलाकर बेहोश कर दिया गया था. इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म किया गया था.

कौन हैं गायत्री प्रजापति?
गायत्री प्रजापति समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रह चुके हैं. उनपर भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं. उन्हें मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने मंत्रिमंडल से बर्खास्त भी किया था, लेकिन बाद में दोबारा शामिल कर लिया था. गायत्री प्रजापति ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर अमेठी से किस्मत आजमाई, लेकिन हार गए. यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान भी उनपर आचार संहिता उल्लंघन का मामला भी देखने को मिला था. जब कानपुर से अमेठी ले जाई जा रही 4000 साड़ियों की एक खेप को पुलिस ने पकड़ा था. बिल पर भी गायत्री प्रजापति का नाम था। इस मामले में केस दर्ज हुआ था.