लखनऊ: मार्च 2017 में सत्‍ता में आई यूपी की नई सरकार ने कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने के निर्देश दिए. बदमाशों पर लगाम के लिए पुलिस ने एनकाउंटर कर अपराधियों में खौफ पैदा किया है. इस साल 4 अगस्त तक यूपी के 24 जिलों में 2,351 शूटआउट हुए, जिसमें 63 बदमाशों की मुठभेड़ के दौरान मौतें हुईं. सरकार ने दावा कि इस कदम से अपराध और अपराधियों पर काफी हद तक लगाम लगी है. इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मई में, एनएचआरसी ने राज्य को इन मामलों में से 17 एनकाउंटर की जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम बनाने का निर्देश दिया. बता दें कि पिछले महीने, सुप्रीम कोर्ट ने भी मुठभेड़ों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया था.

रायबरेली में पुलिस मुठभेड़ पर सवाल, पकड़े गए बदमाश ने कहा- दिन में पकड़ा और रात मार दी गोली

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एनकाउंटर के 63 मामलों में से 41 से जुड़े परिवारों ने शिकायत दर्ज कराई, जबकि 21 मौतों से संबंधित 20 मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई. बाकी के 21 मामलों में, या तो परिवार को एफआईआर उपलब्ध नहीं कराया गया है या परिवार वालों ने मामले में आगे पता नहीं लगाया है. एनकाउंटर को लेकर चौंकाने वाले तथ्‍य सामने आए हैं. एक जांच के दौरान पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी में एक चौंकाने वाला पैटर्न मिला है, इसमें बदमाशों से मुठभेड़ के बाद होने वाले घटनाओं के क्रम के एक समान वर्णन किया गया है, जबकि पुलिस की बदमाशों से मुठभेड़ अलग-अलग जगहों पर हुई है.

पुलिस से मुठभेड़ में इनामी बदमाश गिरफ्तार, तीन पुलिसकर्मी जख्मी

जांच के के दौरान कुछ बातें चौंकाने वाल तथ्य सामने आए हैं, जो कि इस प्रकार है:
1. मुठभेड़ की 12 एफआईआर में पुलिस ने लिखा है कि मुखबिर की सूचना के बाद बदमाशों की चेकिंग की गई, जिसमें बदमाश बाइक से वहां पहुंचा. इस दौरान वह पुलिस को देखकर भागने लगा, जिस पर पुलिस ने चेतावनी दी और उनका पीछा किया. इसके बाद पुलिस ने बदमाशों को मुठभेड़ में मार गिराया.
2. 11 एफआईआर में, पुलिस का कहना है कि उन्होंने अपने सीखे गए तरीके और प्रशिक्षण के अनुसार काम किया था.
3. 18 एफआईआर में, पुलिस ने अपना “अतुलनीय साहस रिकॉर्ड किया है.
4.16 एफआईआर में, पुलिस ने उल्लेख किया है कि उन्होंने जान की परवाह किए बिना बदमाशों से मुठभेड़ में हिस्‍सा लिया. इनमें से नौ में बदमाश ने पुलिस पर भी फायरिंग की थी, लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट पहने होने की वजह से पुलिस के दो दरोगा की जान बची थी.
5. 16 पोस्टमॉर्टम रिपोर्टों में से इंडियन एक्सप्रेस ने पाया कि बदमाशों को छाती में, सिर पर गोली मार दी गई थी, जबकि ज्यादातर को कई बार गोली मारी गई थी, जिसमें जय हिंद यादव (3 अगस्त, 2017 को मारे गए थे आजमगढ़ में), उनको 19 से अधिक घाव मिले हैं.
6. 41 मामलों में से 25 में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट नहीं मिली.

इसको लेकर यूपी के पूर्व महानिदेशक प्रकाश सिंह का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के रोडमैप के आधार पर पुलिस को सुधार की जरूरत है. एफआईआर में कुछ बुनियादी आम शब्द हैं. सभी मुठभेड़ों में भाषा और तथ्यों को आम नहीं होना चाहिए. एफआईआर लिखते समय सावधानी बरतनी चाहिए.