लखनऊ: कैराना-नूरपुर उपचुनाव में जीत के बाद गठबंधन दलों की बांछे खिल गई हैं. कुशीनगर जिले में राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के प्रवक्ता अंशुमान सिंह ने कहा कि कैराना में भाजपा के पूरी ताकत झोंकने के बाद भी जाट मतदाता रालोद के साथ खड़े दिखे. रालोद ने हिंदू-मुस्लिम एकता बहाल करने में सफलता हासिल की. आने वाले लोकसभा चुनाव में यही एकता भाजपा को सत्‍ता के सिंहासन से हटाएगी. Also Read - क्या उत्तराखंड में सीएम को बदला जाएगा? बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने कही ये बात

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सोमवार को पडरौना में पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, केंद्रीय मंत्री सत्यपाल व तमाम जाट विधायक यहां कोई करिश्मा नहीं दिखा पाए, जबकि रालोद सुप्रीमो चौधरी अजित सिंह व जयंत चौधरी ने कैराना में दिन-रात प्रचार किया और लोगों ने उनकी बातों को सही माना. वहीं जिलाध्यक्ष रामभवन राव ने कहा कि शामली में कैराना लोकसभा उपचुनाव में जाट बिरादरी को एकजुट करने में रालोद बेशक कामयाब हो गया. शामली विधानसभा क्षेत्र के जाट बहुल गांव में भाजपा प्रत्याशी कहीं बराबरी के मुकाबले में रहीं तो कहीं पिछड़ भी गईं.

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नकुड़ और गंगोह में जमकर चला हैंडपंप

उन्होंने कहा कि कैराना लोकसभा क्षेत्र में शामली और थानाभवन विधानसभा क्षेत्र में जाट बिरादरी के वोटरों की संख्या अहम होती है. उसकी वजह से दलित-मुसलिम और जाट गठजोड़ को माना जा रहा था. जिसने सहारनपुर के नकुड़ और गंगोह विधानसभा क्षेत्र में जमकर हैंडपंप चला. अब पूरे प्रदेश में रालोद ने एक नई ताकत के रूप में उभरी है. राव ने बताया कि 6 जून को नवनिर्वाचित सांसद बेगम तब्बसुम हसन का स्वागत कार्यक्रम लखनऊ में होना है, जिसमें पूर्वांचल के रालोद कार्यकर्ता भी जाएंगे.