इलाहाबाद: इलाहाबाद स्थित मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज के विद्यार्थियों में रैगिंग को लेकर इस तरह का भय है कि वे कॉलेज प्रशासन के कई बार अपील जारी करने के बावजूद शिकायत करने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं. जानकारी के मुताबिक कॉलेज के करीब 100 छात्रों के साथ रैगिंग हुई है. छात्रों द्वारा शिकायत नहीं किए जाने के बावजूद राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले का स्‍वत: संज्ञान लेते हुए राज्‍य के चीफ सेक्रेटरी, प्रिंसिपल सेक्रेटरी और कॉलेज के प्रिंसिपल से चार सप्‍ताह के अंदर जवाब मांगा है. Also Read - 12 फरवरी: वो दिन जब महात्मा गांधी की अस्थियों को किया गया था विसर्जित, 10 लाख लोगों ने दी थी अंतिम विदाई

शाम करीब चार बजे कक्षा खत्म होने के बाद कतार में उन्हें छात्रावास की ओर जाते देखा गया. ज्यादातर छात्रों के सिर मुंडवाए गए थे और जब उनमें से एक छात्र से इस बारे में पूछा गया तो उसने कहा कि यह नए छात्रों के लिए यहां की परंपरा है. यह पूछने पर कि यह सब (रैगिंग) कब से चल रहा है, “एक अन्य छात्र ने बताया कि जब से कॉलेज खुला है.” हालांकि, ज्यादातर छात्रों ने बातचीत करने से परहेज किया और सभी छात्रावास की ओर कूच कर गए.

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मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. वत्सला मिश्रा ने बताया, “हमने हर जगह नोटिस बोर्ड पर रैगिंग के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने का अनुरोध कर रखा है. हमारे तीनों विभागों- एनाटोमी, फिजियोलाजी और बायो-केमिस्ट्री के विभागाध्यक्षों ने अपनी व्यक्तिगत ईमेल आईडी दे रखी है और कहा है कि शिकायत करने वाले छात्र का नाम पूरी तरह से गोपनीय रखा जाएगा.” हालांकि, उन्होंने कहा कि अभी तक किसी भी छात्र ने रैगिंग के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की है. “हमारे वार्डन छात्रों के साथ होस्टल तक जाते हैं जिससे किसी भी छात्र के साथ रैगिंग न हो. नवप्रवेशी सभी छात्र छात्राओं से हम स्पष्ट तौर पर कहना चाहेंगे कि कोई भी सीनियर उनका करियर या रिजल्ट खराब नहीं कर सकता है, इसलिए उन्हें किसी से डरने की जरूरत नहीं है.” मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज में कुल पांच बैच हैं और प्रत्येक बैच में करीब 150 छात्र-छात्राएं हैं.

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इधर, राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में राज्‍य सरकार और कॉलेज प्रशासन को नोटिस भेजा है. आयोग ने पूछा है कि दोषी छात्रों के खिलाफ क्‍या कार्रवाई की गई है. इसके अलावा कॉलेज कैंपस में छात्रों की सुरक्षा व्‍यवस्‍था की भी विस्‍तृत रिपोर्ट देने का आदेश आयोग ने दिया है.