नई दिल्‍ली: उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार द्वारा अयोध्या में दी गई पांच एकड़ जमीन स्वीकार कर ली है. सुन्नी वक्फ बोर्ड इस जमीन के लिए एक ट्रस्‍ट बनाएगा. बोर्ड ने कहा कि इस पांच एकड़ जमीन पर मस्जिद के साथ-साथ ‘इंडो- इस्लामिक सेंटर’, चैरिटेबल अस्पताल और लाइब्रेरी बनाई जाएगी. Also Read - VIDEO: Lockdown के दौरान मस्जिद में नमाज अदा की, बाहर निकलते ही पड़े पुलिस के डंडे

उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार द्वारा अयोध्या में दी गई पांच एकड़ जमीन स्वीकार करते हुए उस पर मस्जिद के साथ-साथ ‘इंडो-इस्लामिक’ रिसर्च सेंटर, अस्पताल और लाइब्रेरी भी बनवाने का फैसला किया है. Also Read - Ayodhya Ram Mandir: मंदिर निर्माण का प्रथम चरण, भव्य मंदिर में चांदी के सिंहासन पर बैठेंगे रामलला, CM योगी की गोद में पहुंचे नए स्थान पर

बोर्ड के अध्यक्ष जफ़र फारूकी ने बोर्ड की बैठक के बाद मीडियाकर्मियों को बताया ‘बोर्ड की बैठक में राज्य सरकार द्वारा अयोध्या में दी जा रही पांच एकड़ जमीन को स्वीकार किए जाने का निर्णय लिया गया.’ Also Read - बाबरी विध्वंस मामले में 24 मार्च को दर्ज होंगे आरोपियों के बयान

बोर्ड के अध्यक्ष ने बताया कि बोर्ड ने यह भी फैसला किया है कि वह उस जमीन पर निर्माण के लिए एक ट्रस्ट भी गठित करेगा. उस जमीन पर एक मस्जिद के निर्माण के साथ-साथ एक ऐसा केन्द्र भी स्थापित किया जाएगा जो पिछली कई सदियों की ‘इंडो- इस्लामिक’ सभ्यता को प्रदर्शित करेगा.

फारूकी ने बताया कि इसके साथ ही भारतीय तथा इस्लामिक सभ्यता के अन्वेषण तथा अध्ययन के लिए एक केंद्र तथा एक चैरिटेबल अस्पताल एवं पब्लिक लाइब्रेरी तथा समाज के हर वर्ग की उपयोगिता की अन्य सुविधाओं की व्यवस्था भी की जाएगी. उन्होंने एक सवाल पर कहा, ” मस्जिद कितनी बड़ी होगी, यह हम वहां की स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर तय करेंगे.”

फारूकी ने कहा कि ट्रस्ट तथा उसके पदाधिकारियों से संबंन्धित सम्पूर्ण विवरण की घोषणा उसके गठन के बाद की जाएगी. उन्होंने कहा कि ट्रस्ट बहुत जल्द गठित होगा.

फारूकी ने बताया कि बहुत से लोगों ने मस्जिद के साथ-साथ रिसर्च सेंटर, अस्पताल और लाइब्रेरी बनवाने का भी सुझाव दिया था. उन पर विचार के बाद यह निर्णय लिया गया है. इस सवाल पर कि बनने वाली मस्जिद का नाम ‘बाबरी मस्जिद’ होगा या नहीं, उन्होंने कहा कि इस बारे में ट्रस्ट फैसला करेगा. इससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है. मस्जिद कितनी बड़ी होगी, यह स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर तय किया जाएगा.

फारूकी ने कहा कि ट्रस्ट तथा उसके पदाधिकारियों से संबंधित सम्पूर्ण विवरण की घोषणा उसके गठन के बाद की जाएगी. ट्रस्ट बहुत जल्द गठित होगा. बैठक में बोर्ड के आठ में से छह सदस्य मौजूद थे. इमरान माबूद खां और अब्दुल रज्जाक खां बैठक में शामिल नहीं हुए.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवम्बर 2019 को अयोध्या मामले में फैसला सुनाते हुए संबंधित स्थल पर राम मंदिर का निर्माण कराने और सरकार को मामले के मुख्य मुस्लिम पक्षकार सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को अयोध्या में किसी प्रमुख स्थान पर मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया था.