लखनऊ: देश में मंदिर और मस्जिद को लेकर जारी बहस के बीच उत्‍तर प्रदेश के जालौन जिले में दोनों समुदायों के लोगों ने समझदारी की मिसाल पेश करते हुए एक पुल के निर्माण के लिये अपनी-अपनी इबादतगाहों को दूसरे स्‍थान पर ले जाने पर रजामंदी दे दी. करीब 14 साल से लंबित इस पुल के निर्माण के लिये हिन्‍दुओं और मुसलमानों ने आपसी रजामंदी से दो मंदिरों, सात मजारों और एक मस्जिद को दूसरे स्‍थान पर ले जाने का फैसला किया. इसके अलावा फ्लाईओवर के निर्माण के लिये रास्‍ते में पड़ रही दरगाह की एक दीवार को भी आपसी सहमति से गिरवा दिया गया.

जालौन के पुलिस अधीक्षक डॉक्‍टर अरविंद चतुर्वेदी ने बताया कि कानपुर-झांसी राष्‍ट्रीय राजमार्ग पर कालपी खंड के बीच यातायात को सुगम बनाने के लिये भारतीय राष्‍ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को डेढ़ किलोमीटर लम्‍बा उपरिगामी सेतु बनाना था लेकिन पुल के निर्माण से पहले उसके एक तरफ उसे साढ़े पांच मीटर की सर्विस रोड बनाने के लिये मुश्किल का सामना करना पड़ा क्‍योंकि इसके रास्‍ते में दो मंदिर, सात मजारें और एक मस्जिद पड़ रही थी. इसी कारण पिछले 14 साल से काम अटका हुआ था.

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सभी पक्षकारों से बातचीत के बाद रजामंदी बनी
उन्‍होंने बताया कि मौजूदा जिला प्रशासन और पुलिस तंत्र ने मसला सुलझाने के लिए हिन्‍दुओं और मुसलमानों समेत सभी पक्षकारों के साथ कई दौर की बातचीत की. इस दौरान यह रजामंदी बन गयी कि विकास कार्य के लिये इन इबादतगाहों को दूसरे स्‍थानों पर ले जाया जाएगा. इस पर आठ सितंबर को काम हुआ. चतुर्वेदी ने बताया कि रास्‍ते में पड़ रहा एक शिव मंदिर हटाया जा चुका है जबकि एक दुर्गा मंदिर के गर्भगृह को नया मंदिर बनते ही प्रतिमाओं के साथ वहां प्राण-प्रतिष्ठित कर दिया जाएगा. जिस जगह नया मंदिर बनेगा, उसे चिह्नित भी कर लिया गया है.

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सातों मजारों को भी स्‍थानांतरित किया
उन्‍होंने बताया कि इसके अलावा सातों मजारों को भी स्‍थानांतरित किया गया है. इसके लिये पहले से ही ताबूत मंगवाये गये थे. एक मस्जिद को भी दूसरे स्‍थान पर ले जाया गया है. यह पूरा कार्य ‘ऑपरेशन सहयोग’ के तहत किया गया. इस बीच, जालौन के जिलाधिकारी मन्‍नान अख्‍तर ने बताया कि सभी धार्मिक स्‍थलों को एक ही दिन विस्‍थापित किया गया, जिसमें दोनों समुदायों के लोगों ने सहयोग किया. उन्‍होंने बताया कि इस कार्य पर सहमति बनाने के लिये करीब पांच-छह महीनों तक सभी पक्षकारों से अनेक बार बैठक की गयी. हमने सभी की सहमति लेकर ही काम किया. जालौन के लोगों की इस समझदारी को एक मिसाल के तौर पर देखा और सराहा जा रहा है.