UP Vikas Dubey Case: कानपुर के बिकरू गांव (Kanpur Bikru Case) में हुए विकास दुबे कांड  (Vikas dubey case) में पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने सोमवार को कांड को अंजाम देने के बाद फरारी के दौरान विकास दुबे को शरण देने वाले सात लोगों को गिरफ्तार किया है और इसके साथ ही पुलिस ने सेमी ऑटोमैटिक स्प्रिंगफील्ड राइफल समेत कई हथियार बरामद किये हैं. बड़ी बात है कि राइफल का इस्तेमाल पुलिस वालों पर हमले में किया गया था. Also Read - UP News: Instagram पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर छात्रा को बताया कॉल गर्ल, FIR दर्ज

बता दें कि पुलिस ने इन हथियारों की तलाशी के लिए विकास दुबे का घर तक खोद डाला था, लेकिन रायफल नहीं मिली. इतना ही नहीं कई दिनों तक उसके घर से कुछ दूर स्थित तालाब का पानी निकल कर तलाशी अभियान चला था. Also Read - UP: बीजेपी नेता ने यूपी पुलिस की एसओजी टीम पर लगाया अपनी कार पर फायरिंग करने का आरोप, मामले ने तूल पकड़ा

क्या था चौबेपुर का बिकरू कांड Also Read - Uttar Pradesh: मुजफ्फरनगर में पुलिस ने हथियारों की अवैध फैक्टरी का किया भंडाफोड़

कानपुर में चौबेपुर के बिकरू गांव में दो जुलाई 2020 की रात दबिश देने गई पुलिस टीम पर गैंगस्टर विकास दुबे और उसके गुर्गों ने हमला कर दिया था. विकास दुबे ने साथियों की मदद से सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी. इसके बाद विकास दुबे रात में ही फरार हो गया था और अपने सहयोगियों के पास जाकर छिप गया था.

इस वारदात के करीब सात दिन के बाद विकास दुबे को मध्य प्रदेश पुलिस ने महाकाल मंदिर से पकड़ लिया था और उसे यूपी पुलिस के सुपुर्द कर दिया था. जिसके बाद मध्य प्रदेश से कानपुर लाते समय गाड़ी पलट जाने पर विकास ने भागने का प्रयास किया था, जिससे एनकाउंटर में वह पुलिस के हाथों मारा गया था.

पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया था, हथियार बरामद हुए थे

पुलिस की जांच में पता चला था कि हमलावरों ने पुलिस टीम पर सेमी ऑटोमेटिक राइफल से फायरिंग की थी. पुलिस ने मौके से अमेरिकन विंचेस्टर कारतूस बरामद किए थे. बता दें कि पुलिस अबतक इस मामले में आरोपित 36 लोगों को जेल भेज चुकी है.

पुलिस को वारदात में दो सेमी ऑटोमेटिक राइफल के प्रयोग होने की जानकारी मिली थी, जिनका प्रयोग विकास दुबे ही करता था. उसकी रायफल का लाइसेंस विकास के भांजे और छोटे भाई के नाम पर था. कांड के बाद पुलिस को न तो विकास की सेमी ऑटोमेटिक राइफल बरामद हुई थी और न ही फरारी के समय उसे आश्रय देने वालों का पता चला था.