कैराना: इसमें कोई संदेह नहीं कि कैराना कभी खुशनुमा हुआ करता था. समृद्ध इतिहास, सामाजिक एकता के किस्से, किराने के घराने की संगीत की गूँज कैराना से होते हुए पूरे देश में गूंजती रही है, लेकिन दो साल पहले कुछ ऐसा हुआ कि खुशनुमा कैराना पर ‘दाग’ लग गया. ऐसा चटख बदरंग दाग, जिसने कैराना की सूरत को बिगाड़ दिया. न सिर्फ कैराना बल्कि देश के कई हिस्सों में तनाव फैला दिया था. India.com बताने जा रहा है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ था. कैराना की हकीकत क्या थी… Also Read - भाई छोटी बहन संग कर रहा था 'छेड़छाड़', बहन ने गुस्से में दरांती से काट डाला...

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आखिर क्यों लगा था कैराना पर दाग Also Read - मामूली घरेलू विवाद में पिता को आया इतना गुस्सा कि दोस्त के साथ तीन बेटियों को नदी के पास ले जाकर....! तलाश जारी

2016 में कैराना से बीजेपी के सांसद रहे हुकुम सिंह ने पलायन का मुद्दा उठाया था. उन्होंने कहा कि मुस्लिमों के डर से हिंदू अपना घर छोड़ कर जा रहे हैं. कस्बे में जगह-जगह घरों में ‘मकान बिकाऊ है’ लिखा दिखने लगा. रिपोर्ट्स में कहा गया कि 350 से अधिक परिवारों ने कैराना छोड़ दिया. इस मुद्दे ने भारतीय राजनीति, खासकर यूपी की सियासत में भूचाल ला दिया. बीजेपी ने इस मुद्दे को पूरे जोर-शोर से उठाया. मामले को उठाने वाले कैराना से सांसद रहे हुकुम सिंह ने कैराना को ‘यूपी का कश्मीर’ तक बता दिया.

पलायन तो हुआ था, लेकिन…

कैराना के इस मुद्दे पर तब सत्ता में रही समाजवादी पार्टी ने ध्रुवीकरण करने का आरोप लगाया. चुनाव के दौरान बीजेपी ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया गया, लेकिन इसके बाद बीजेपी के सांसद हुकुम सिंह ने ही यू-टर्न लेते हुए बयान दिया कि एक ख़ास समुदाय के कारण नहीं बल्कि कैराना में अपराधियों से परेशान होकर लोग पलायन कर रहे हैं. इस मुद्दे को उठाने के बाद भी हुकुम सिंह अपनी बेटी मृगांका सिंह को 2017 में विधानसभा चुनाव में जीत नहीं दिला सके थे.

कभी ‘किराने के तरानों’ के लिए दुनिया में मशहूर था कैराना, भारत रत्न भीमसेन जोशी, मोहम्मद रफ़ी रहे यहां के शागिर्द

ये कहते हैं यहां के लोग

कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये बात सामने आई कि पलायन तो हुआ, लेकिन मुस्लिमों के डर नहीं बल्कि अपराधियों के डर से. अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि हफ्ता, फिरौती के लिए अपहरण, हत्याएं की जाने लगीं. धमकियाँ और लूटपात आम बात हो गई थी. एक साल में तीन व्यापारियों की हत्याएं हुई थी. इसी से परेशान होकर लोगों ने यहां से पलायन शुरू कर दिया. स्थानीय लोगों का कहना था कि तत्कालीन सपा सरकार के शासन में यहां कानून व्यवस्था बिगड़ी थी. कानून व्यवस्था से सभी समुदायों के लोग परेशान थे. स्थानीय पत्रकार संदीप इंसान कहते हैं कि कैराना में मंदिर-मस्जिद आसपास हैं. बाजारों में कोई दुकान हिंदू की है कोई मुस्लिम की. सब अगल-बगल में. लोग भाईचारे के साथ रहते हैं.

बीजेपी ने इस चुनाव में भी उठाया मुद्दा

ये मुद्दा उठाने वाले कैराना के सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद लोकसभा सीट खाली हो गई. इस सीट पर हुए उप चुनाव में बीजेपी ने हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को मैदान में उतारा था. आज 31 मई को यहां मतगढ़ना हो रही है. इससे पहले उन्होंने चुनाव के दौरान कहा था कि लोगों ने डर कर पलायन किया था. अब परिवार वापस लौट आए हैं. इसमें सुधरी कानून व्यवस्था का हाथ है. वहीँ, उनके सामने उतरी सपा-आरएलडी की प्रत्याशी तबस्सुम हसन का कहना था कि मुद्दे को साम्प्रदायिक रंग दिया गया था. कैराना उप चुनाव के आज नतीजे आ रहे हैं. बीजेपी प्रत्याशी मृगांका सिंह से विपक्ष की गठबंधन प्रत्याशी तबस्सुम हसन भारी बढ़त बनाए हुए हैं.

किराने से थी कैराना की पहचान

कैराना कभी दुनिया के लिए ‘किराने के तरानों’ की वजह से मशहूर रहा है. कैराना में कुछ साल से बढ़ी हिन्दू-मुस्लिम में तल्खियों के बीच अगर गूंजते रहे उन तरानों की गूंज सुन ली जाती तो शायद खाई बढ़ नहीं पाती. कैराना में भारतीय शास्त्रीय संगीत का अहम् मुकाम रहा है. कैराना में देश के सर्वोच्च और ‘भारत रत्न’ गायकों के तराने गूंजते रहे हैं. इस घराने ने ही पंडित भीमसेन (जिन्हें सर्वोच्च पुरस्कार भारत रत्न मिला है), गजल गायिका बेगम अख्तर और संवई गंधर्व जैसे महान संगीतज्ञ देश और दुनिया को दिए. किराना घराने को भारतीय शास्त्रीय संगीत की सबसे अहम् बुनियाद मानी जाती है.