Uttar Pradesh, Agra, UP, COVID-19, Coronavirus, oxygen, oxygen Crisis, News: आगरा: सांस लेने में तकलीफ से जूझ रहे अपने पति को लेकर तीन-चार अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद रेणू सिंघल एक ऑटो रिक्शा से एक सरकारी अस्पताल पहुंची और उन्होंने अपने पति को मुंह से भी सांस देने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी. पति को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी और देखकर पत्‍नी ने उसे बचाने की जुगत में अपने मुंह से भी सांस देने की कोशिश की, लेकिन अपनी जान को खतरे में डालने के बावजूद भी वह पति को बचा नहीं पाई. इस महिला को अपने पति को अस्‍पताल लाने के लिए एंबुलेंस भी उपलब्ध नहीं हो पाई तो उसे ऑटो रिक्‍शा का सहारा लेना पड़ा. एसएनएमसी के डॉक्टरों ने रवि को मृत घोषित कर दिया. यह घटना बीते शुक्रवार की है.Also Read - यूपी: प्रधानाध्यापक समेत दो लोगों को गोली मार कर भाग रहे बदमाशों की पुलिस के साथ मुठभेड़, ये हाल हुआ

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आगरा के आवास विकास सेक्टर सात की रहने वाली रेणू सिंघल अपने पति रवि सिंघल (47) को सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी) एंड हॉस्पिटल लेकर आई. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक उसके पति को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी और उसे बचाने की जुगत में रेणू ने उसे अपने मुंह से भी सांस देने की कोशिश की. रेणू को एंबुलेंस भी उपलब्ध नहीं हो पाई. एसएनएमसी के डॉक्टरों ने रवि को मृत घोषित कर दिया. Also Read - यूपी विधानसभा में भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय विधेयक-2022 समेत दो बिल पारित

रेणु के पति को पहले भर्ती करने से तीन-चार अस्पतालों ने किया था इनकार
इससे पहले तीन-चार निजी अस्पतालों ने रेणू के पति को भर्ती करने से इनकार कर दिया. अस्पतालों में भर्ती करने से इनकार करने की घटनाएं शहर में आम हो गई है. आगरा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी आरसी पांडे ने कहा कि जिले में मेडिकल ऑक्सीजन की कमी है. उन्होंने कहा, हम उपलब्धता के अनुसार व्यवस्था कर रहे हैं. बहरहाल उन्होंने दावा किया कि आगरा के अस्पतालों में गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए बिस्तर उपलब्ध हैं. Also Read - अखिलेश को योगी का करारा जवाब- हाथ जोड़कर बस्ती को लूटने वाले, भरी सभा में सुधारों की बात करते हैं

 भर्ती करने से इनकार कर रहे अस्‍पताल
कई लोगों ने शिकायत की है कि उन्हें एक बिस्तर की तलाश में एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल के चक्कर काटते हुए घंटों तक इंतजार करने के लिए मजबूर किया गया. शनिवार को एक निवासी ने शिकायत की कि उसकी सास को अस्पताल में भर्ती करने से इनकार कर दिया गया, जिससे उनकी मौत हो गई.

अस्पताल में वेंटिलेटर नहीं होने पर महिला मरीज की भी मौत
गढ़ी भदौरिया की 52 वर्षीय मरीज मीरा देवी की एक निजी अस्पताल में वेंटिलेटर उपलब्ध न होने के कारण मौत हो गई. वह कोरोना वायरस से संक्रमित थीं और उनका आगरा के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था. उनके बेटे महेंद्र पाल सिंह ने कहा, ”तीन से पांच निजी अस्पतालों ने मेरी मां को भर्ती करने से इनकार कर दिया और उन्हें सरकारी अस्पतालों में भी भर्ती नहीं किया गया. किसी तरह उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वेंटिलेटर न होने के कारण उनकी मौत हो गई. सीएमओ ने बताया कि आगरा में कोविड-19 मरीजों के लिए 34 अस्पताल हैं और सरकारी एसएनएमसी में कोविड वार्ड में करीब 290 बिस्तर हैं. आगरा में शनिवार को कोरोना वायरस के 530 नए मामले आए, जिससे संक्रमण के मामले बढ़कर 16,726 पर पहुंच गए.