लखनऊ: भारत में अमेरिका के राजदूत केनेथ आई जस्टर ने मंगलवार को कहा कि दोनों देशों के बीच पिछले दो दशक में रक्षा कारोबार शून्य से 18 अरब डॉलर पहुंच गया है. लखनऊ में ‘रक्षा प्रदर्शनी’ की पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रम में जस्टर ने कहा कि मैंने 2001 में जब अमेरिका—भारत संबंधों के वाणिज्य उपमंत्री के रूप में काम करना शुरू किया था, तब भारत और अमेरिका के बीच वस्तुत: कोई रक्षा बिक्री नहीं होती थी. आज औसत आंकडा लगभग 18 बिलियन अमेरिकी डॉलर है. साथ ही कई क्षेत्रों में करोड़ों डॉलर की अतिरिक्त बिक्री पाइपलाइन में है. Also Read - Corona Vaccine News: अमेरिका ने Johnson & Johnson के टीके पर की अस्थायी रोक की सिफारिश, जानें वजह..

जस्टर भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय सहयोग को लेकर किये गये सवालों का जवाब दे रहे थे. उनसे यह भी पूछा गया था कि आने वाले पांच साल में रक्षा सहयोग कितना बढेगा. जब सवाल किया गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत आने की उम्मीद है, ऐसे में रक्षा क्षेत्र में कितना सहयोग होगा, तो उन्होंने कहा कि जहां तक राष्ट्रपति की यात्रा का सवाल है, उसके लिए हमें वाशिंगटन से जानकारी लेनी होगी क्योंकि ऐसी यात्रा के बारे में अब तक कोई घोषणा नहीं हुई है. जस्टर ने कहा, राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारत आने की इच्छा जतायी है लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. Also Read - चीन कर सकता है साइबर हमले, भारत मुकाबले को तैयार: जनरल बिपिन रावत

उड्डयन, नौसैनिक क्षेत्र और थल सेना से जुड़े अत्याधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन
प्रदर्शनी में अमेरिका क्या दिखाने वाला है, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि उड्डयन क्षेत्र, नौसैनिक क्षेत्र और कुछ हद तक थल सेना से जुड़े अत्याधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन किया जाएगा. यह पूछने पर कि क्या अमेरिकी सरकार उत्तर प्रदेश सरकार के साथ रक्षा गलियारा परियोजना में निवेश के लिए कोई समझौता करेगी, जस्टर ने कहा कि उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार के साथ सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर के संबंध में कोई जानकारी नहीं है. चूंकि अमेरिका में रक्षा उद्योग निजी कंपनियों के हाथों में है, ऐसे में कंपनियां ही समझौते और सौदे करती हैं. सरकार के रूप में हम रक्षा कारोबार को नियंत्रित नहीं करते हैं. Also Read - US Capitol Lockdown: अमेरिकी संसद के बाहर कार ने पुलिस अधिकारियों को मारी टक्कर, यूएस कैपिटॉल में लगा लॉकडाउन