नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार ने हत्या और रेप जैसे मामलों में पीड़ित दलितों को हर महीने महंगाई भत्ता के साथ पांच हजार रुपये पेंशन देने के पुराने फैसले को लागू करने का आदेश दिया है. 2016 में बनी नियमावली को उत्तर प्रदेश एससी-एसटी कमीशन के चेयरमैन बृजलाल ने लागू करने के निर्देश दिए हैं.

उत्तर प्रदेश एससी-एसटी कमीशन के चेयरमैन बृजलाल ने 14 जून 2016 के बाद अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत पंजीकृत मामलों में पेंशन का प्रस्ताव जिलाधिकारी और समाज कल्याण अधिकारी को भेजने के निर्देश सभी जिलों के एसपी-एसएसपी को दिए हैं. उन्होंने निर्देश दिया है कि इन सभी मामलों पर 31 जनवरी तक अपनी रिपोर्ट आयोग को भी उपलब्ध कराई जाए.

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इसमें कहा गया है कि यह पेंशन व्यवस्था घटना के दिन से लागू होगी इसका भी ध्यान रखा जाए. जिलाधिकारी से उम्मीद की गई है कि वह प्रस्तावों पर पेंशन और अन्य सुविधा स्वीकृत कर 28 फरवरी तक अपनी रिपोर्ट आयोग को भेज देंगे. आयोग ने डीजीपी, डीजी विशेष जांच, सभी मंडलायुक्त, जोनल एडीजी, रेंज आईजी और डीआईजी को इसका अनुपालन कराने की जिम्मेदारी दी है.

पेंशन योजना के प्रस्ताव के मुताबिक, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति से संबंध रखने वाले मृतक व्यक्ति, विधवा या अन्य आश्रितों को हर महीने 5 हजार रुपये की मूल पेंशन के साथ महंगाई भत्ता और मृतक के परिवार के सदस्यों को रोजगार और कृषि भूमि और घर उपलब्ध कराया जाएगा. यहां तक कि पीड़ित परिवार के बच्चों की स्नातक तक की शिक्षा का पूरा खर्चा और उनका भरण-पोषण भी किया जाएगा. आश्रित बच्चों को राज्य सरकार द्वारा पूर्णतः वित्त पोषित आश्रम, स्कूलों या आवासीय स्कूलों में दाखिल कराया जाएगा.