नई दिल्ली. एमनेस्टी इंडिया (Amnesty India) ने मंगलवार को जारी नई रिपोर्ट में बताया कि 2018 में हाशिए पर पड़े, खासतौर पर दलितों के खिलाफ घृणित अपराध के 200 से ज्यादा कथित मामले सामने आए. इस तरह की घटनाओं में उत्तर प्रदेश लगातार तीसरे साल शीर्ष पर है. एमनेस्टी इंडिया ने अपनी वेबसाइट पर रिकॉर्ड जारी करते हुए कहा कि घृणित अपराध के मामले हाशिये पर पड़े समुदायों के खिलाफ सामने आए जिनमें दलित एवं आदिवासी, जातीय या धार्मिक अल्पसंख्यक समूह, ट्रांसजेंडर व्यक्ति तथा प्रवासी शामिल हैं.

वेबसाइट ने हिन्दी और अंग्रेजी के मुख्य धारा की मीडिया में आए मामलों पर विश्वास किया है. वर्ष 2018 में वेबसाइट ने कथित घृणित अपराध की 218 घटनाओं का दस्तावेजीकरण किया है. इनमें से 142 मामले दलितों, 50 मामले मुसलमानों और आठ-आठ मामले ईसाई, आदिवासी और ट्रांसजेंडरों के खिलाफ हैं. एमनेस्टी इंडिया ने कहा कि 97 घटनाएं हमले की हैं और 87 मामले कत्ल के हैं. 40 मामले ऐसे हैं जिनमें हाशिये पर पड़े समुदाय की महिला या ट्रांसजेंडर व्यक्ति को यौन हिंसा का सामना करना पड़ा है.

इसने कहा कि खासतौर पर दलित महिलाओं ने बड़ी संख्या में यौन हिंसा का सामना किया है. 40 में से 33 मामले उनके खिलाफ ही हुए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, गाय संबंधित हिंसा और तथाकथित ‘ऑनर’ हत्या कथित घृणित अपराधों की आम मिसालें हैं. इसने कहा कि उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु और बिहार शीर्ष पांच राज्यों में शामिल हैं जहां कथित घृणित अपराध के अधिक मामले हैं. उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 57 मामले सामने आए और यह लगातार तीसरा साल है जब यह प्रदेश शीर्ष पर है.