Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने डॉक्टरों को लेकर बड़ा फैसला किया है,  इसके तहत पीजी करने के बाद डॉक्टरों को कम से कम 10 साल तक सरकारी अस्पताल में सेवाएं देनी होंगी और अगर कोई डॉक्टर इस दौरान बीच में नौकरी छोड़ता है तो उसे राज्य सरकार को एक करोड़ रुपये की राशि जुर्माने के तौर पर चुकानी होगी. स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव ने इस संबंध में जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि अगर कोई डॉक्टर पीजी कोर्स बीच में ही छोड़ देता है तो उसे तीन साल के लिए डिबार कर दिया जाएगा. इन तीन सालों में वह दोबारा दाखिला नहीं ले सकेंगे. Also Read - UP Panchayat Election 2021: विधानसभा चुनाव से पहले लिटमस टेस्ट, राजभर-ओवैसी साथ लड़ेंगे पंचायत चुनाव

पढा़ई पूरी करने के बाद तुरंत नौकरी ज्वाइन करनी होगी
योगी सरकार के फैसले में यह भी कहा गया है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टरों को तुरंत नौकरी जॉइन करनी होगी. इसके अलावा पीजी के बाद सरकारी डॉक्टरों को सीनियर रेजिडेंसी में रुकने पर भी रोक लगा दी गई है. नए नियम में कहा गया है कि विभाग की ओर से इस संबंध में अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं जारी किया जाएगा. Also Read - High Court का बड़ा फैसला: बेटे का ही नहीं, विवाहित बेटी का भी अनुकंपा की नौकरी पर अधिकार

सरकार ने नीट में दी है छूट Also Read - Sakshi Maharaj का बड़ा बयान, ओवैसी ने बिहार में की थी BJP की मदद, अब बंगाल-UP में भी करेंगे

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने नीट (NEET) में छूट की भी व्यवस्था की है. बता दें कि ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पताल में एक साल नौकरी करने के बाद एमबीबीएस डॉक्टरो को नीट प्रवेश परीक्षा में 10 अंकों की छूट दी जाती है. वहीं, दो साल सेवा देने वाले डॉक्टरों को 20 और तीन साल पर 30 अंको की छूट मिलती है.

इसके साथ ही ये भी बताया गया है कि ये डॉक्टर पीजी के साथ ही डिप्लोमा कोर्सेज में भी दाखिला ले सकते हैं. गौरतलब है कि हर साल सरकारी अस्पतालों में तैनात कई एमबीबीएस डॉक्टर्स पीजी में दाखिला लेने के लिए नीट की परीक्षा देते हैं.