लखनऊ: प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कैंट स्‍टेशन के पास हुए पुल हादसे की जांच करके तीन सदस्यीय तकनीकी टीम बुधवार शाम लखनऊ लौट गई है. बताया गया है कि जांच के दौरान टीम ने फ्लाईओवर का ड्रोन से सर्वे भी करवाया. इसके अलावा घटनास्थल व दूसरी जगहों से निर्माण सामग्रियों का सैंपल भी जुटाया है. साथ ही बीम व सरिया की भी जांच हुई. जांच टीम ने प्रोजेक्ट से जुड़े सेतु निगम के अधिकारियों के भी बयान लिखे हैं. आज यानी गुरुवार को जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जा सकती है. बता दें कि मंगलवार को हादसे के बाद मुख्‍यमंत्री ने 48 घंटे के अंदर जांच रिपोर्ट देने का आदेश दिया था. Also Read - गलवान घाटी झड़प में घायल हुए जवानों से मिले पीएम मोदी, बोले- आपको जन्म देने वाली माताओं को नमन करता हूं

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जानकारी के मुताबिक पुल हादसे की जांच कर रही तकनीकी टीम में सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता भूपेन्द्र शर्मा और जल निगम के प्रबंध निदेशक राजेश मित्तल शामिल हैं. तीनों अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. उन्होंने पुलिस की मदद से ड्रोन के जरिये फ्लाईओवर का सर्वे करवाया. टीम के एक अन्य अधिकारी सेतु निगम के अभियंताओं के साथ मौके पर पहुंचे. उन्होंने फ्लाईओवर निर्माण में लगाई जा रही सरिया, गिट्टी, बालू, सीमेंट आदि मैटेरियल के सैम्पल जुटाए. बीम से सरिया को काटकर निकलवाया गया. करीब दो घंटे तक टीम ने सैम्पल जुटाए. बुधवार देर शाम जांच टीम वहां से लखनऊ वापस लौट आई है. बताया जा रहा है कि आज जांच टीम मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ को जांच रिपोर्ट सौंप सकती है. Also Read - इतिहास गवाह है कि विस्तारवादी ताकतें या तो हार गईं या वापस लौटने के लिए मजबूर हुईं हैं: PM मोदी

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डिजायन बदलने का कारण पूछा

जांच कर रही टीम ने सर्किट हाउस में सेतु निगम के मुख्य प्रोजेक्ट मैनेजर हरिशचंद्र तिवारी व प्रोजेक्ट मैनेजर केआर सूदन ने बयान दर्ज किए. जानकारी के मुताबिक अधिकारियों ने प्रोजेक्ट मैनेजर से फ्लाईओवर की डिजायन तलब की है. उन्होंने पूर्व में हुई डिजायन के बदलने के कारणों की भी रिपोर्ट मांगी है. महीने भर पहले नियुक्त सीपीएम हरिश्चंद्र तिवारी से मॉनीटरिंग के सम्बंध में लिखित रिपोर्ट तैयार करायी. फ्लाईओवर से जुड़े सभी प्रोजेक्ट मैनेजरों की भी जानकारी ली गई.