लखनऊ : उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी के पुल हादसे की जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कारवाई करने के निर्देश सम्बंधित विभाग को जारी कर दिए हैं. पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बन रहे इस पुल में हर कदम पर लापरवाही पाई गई है. इस भीषण हादसे में सूत्रों के मुताबिक 18 लोगों की मौत हो गई थी हालांकि अधिकारिक तौर पर 15 लोगों की मौत की पुष्टि की गई थी. कई लोग घायल हो गए और करोड़ों की संपत्ति नष्ट हुई. Also Read - PM मोदी से चुनाव नहीं लड़ सका था ये BSF का पूर्व जवान, अब खट्टर के खिलाफ किया लड़ने का ऐलान

दोषियों को किसी हाल में बख्शा नहीं जाएगा : सीएम योगी
वाराणसी पुल हादसे की जांच रिपोर्ट आने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि किसी भी हाल में इस हादसे के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. जांच आख्या के निष्कर्षों के बाद सीएम ने उत्तर प्रदेश सेतु निगम के अधिकारियों एम डी राजन मित्तल, मुख्य परियोजना प्रबंधक एस सी तिवारी, पूर्व परियोजना प्रबंधक गेंदालाल, परियोजना प्रबंधक के आर सूदन, सहायक परियोजना प्रबंधक राजेंद्र सिंह, अवर परियोजना प्रबंधक लाल चंद, अवर परियोजना निदेशक राजेश पाल के खिलाफ लोक निर्माण विभाग द्वारा कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया है. साथ ही सीएम योगी ने प्रदेश में चल रही अन्य परियोजनाओं में इस प्रकार की किसी भी अनियमितता की पुनरावृत्ति न होने पाए को लेकर प्रदेश के सभी विभागों को सचेत किया है. Also Read - बनारस: काशी विश्वनाथ के गर्भगृह में नहीं जा सकेंगे श्रद्धालु, जानें नए नियम

वाराणसी प्रकरण में घोर अनियमितताएं
वाराणसी का पुल हादसा टल सकता था अगर जिम्मेदारों ने अपनी भूमिका का निर्वहन ठीक प्रकार से किया होता. पुल निर्माण के हर चरण पर बरती गई थी घोर अनियमितता. यहां तक कि कालम के बीच ढाली गई बीम को क्रॉस बीम से टाई ही नहीं किया गया था. निर्माण कार्य में प्रयुक्त ड्राइंग को भी सक्षम अधिकारी से अनुमोदित नहीं कराया गया था. निर्माण इकाई के पास कार्य स्थल पर ढाली गई कंक्रीट की चेकलिस्ट भी नहीं थी. यहां तक कि जिन अधिकारियों ने निर्माणाधीन पुल का निरीक्षण किया था, उन्होंने टिप्पणी जारी करना तक उचित नहीं समझा था. Also Read - PM मोदी ने की जाति के आधार पर भेदभाव खत्‍म करने की अपील, जातिवाद को बढ़ावा देने वालों की हो पहचान

विपक्षियों का कहना है कि जब पीएम के संसदीय क्षेत्र में जिम्मेदारों द्वारा इस प्रकार की घोर लापरवाही की जा सकती है तो देश और प्रदेश के हालात का स्वत: ही अनुमान लगाया जा सकता है. हालांकि उत्तर प्रदेश सीएम कार्यालय से राज्य के सभी विभागों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं. साथ ही ये भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि प्रत्येक परियोजना की गुणवत्ता की जांच हेतु, तीसरे पक्ष द्वारा नियमित अन्तराल पर निरीक्षण कराया जाए और उसकी विस्तृत रिपोर्ट सीएम कार्यालय को प्रेषित की जाए.