वाराणसी: भारतीय हॉकी टीम के हीरो रहे मोहम्मद शाहिद को मिले पदमश्री व अर्जुन पुरस्कार लौटाए जाएंगे. ये फैसला उनकी पत्नी परवीन शाहिद ने किया है. परवीन सरकार से दिवंगत मोहम्मद शाहिद के नाम पर किए गए वादों के पूरा नहीं किए जाने से नाराज हैं. उन्होंने वाराणसी में प्रेस कांफ्रेस करते हुए कहा कि वह 20 जुलाई को अवार्ड व मैडल वापस करेंगी. वह पीएम को अवार्ड वापस करेंगी. बता दें कि 2016 में 20 जुलाई को ही मोहम्मद शाहिद का निधन हो गया था. मोहम्मद शाहिद भारतीय हॉकी के गिने-चुने शानदार खिलाड़ियों में से एक माने जाते हैं. Also Read - Smart Knife: वाराणसी की लड़कियों ने बनाया 'स्मार्ट चाकू', इमरजेंसी में भेजेगा सिग्नल, जानें खूबियां

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पत्नी ने कहा- हॉकी को आगे बढ़ाने को सरकार ने कुछ नहीं किया

मोहम्मद शाहिद की पत्नी परवीन शाहिद ने वाराणसी में प्रेस कांफ्रेंस की. उनका कहना है कि दो साल पहले सरकार ने मोहम्मद शाहिद के नाम पर हर साल काशी में हॉकी प्रतियोगिता कराने का वादा किया था. इसके साथ ही धनराज पिल्लै व जफ़र इकबाल ने यहां हॉकी अकादमी खोलने की इच्छा जताई थी, लेकिन सरकार ने हॉकी को आगे बढ़ाने के लिए वाराणसी में कुछ नहीं किया. तत्कालीन खेल राज्यमंत्री विजय गोयल ने यहां अखिल भारतीय हॉकी प्रतियोगिता कराने का वादा किया था. इसके साथ ही कई और वादे सरकार ने किए थे, लेकिन इसके बाद उनकी कोई सुध नहीं ली गई.

पीएम को लौटा देंगी पदक, अवार्ड

परवीन ने कहा कि वह चाहती हैं कि काशी में हॉकी आगे बढ़े, लेकिन जब सरकार हॉकी के लिए कुछ नहीं कर सकती तो मैडल और पुरस्कारों का क्या फायदा. परवीन ने यह भी कहा कि वह वादा करने वाले हर व्यक्ति से मिल चुकी हैं, लेकिन इसके बाद भी उनकी बात नहीं सुनी गई. इसलिए उन्होंने इन्हें लौटाने का फैसला किया है. वह पीएम नरेंद्र मोदी को पदक व पुरस्कार वापस करेंगीं.

ड्रिबलिंग के उस्ताद थे मोहम्मद शाहिद

बता दें कि मोहम्मद शाहिद भारतीय हॉकी टीम के हीरो रहे हैं. 14 अप्रैल, 1960 को जन्मे शाहिद ने 20 साल की उम्र में भारतीय हॉकी टीम में चुन लिया गया था. वह 1980 में रूस में हुए ओलंपिक गेम्स में भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रहे. इसी टीम ने ओलंपिक में गोल्ड जीता था. वह भारतीय हॉकी टीम के 1985-86 में कप्तान रहे. उन्हें ड्रिबलिंग के लिए जाना जाता था. देश-विदेश में उम्दा प्रदर्शन करने के लिए उन्हें पदमश्री व अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया था.