लखनऊ: यूपी के वाराणसी जिले में मंदिर और मूर्तियों को तोड़ने का विरोध कर रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्यों के ऊपर एक मूर्ति को क्षतिग्रस्त करने के आरोप लगा है. मामले में वाराणसी की जैतपुरा पुलिस ने स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद और उनके 20 शिष्‍यों के खिलाफ विभिन्‍न धाराओं में केस दर्ज किया है. Also Read - पीएम मोदी ने काशी की जनता से कहा- मास्क नहीं है तो क्या हुआ, गमछा तो है, उसी से मुंह ढकिये

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जैतपुरा पुलिस के अनुसार औसनगंज इलाके से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ‘मंदिर बचाओ आंदोलन’ के दौरान बुधवार को पदयात्रा कर रहे थे. इस दौरान वह उर्धवेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन करने गये. इसके एक हिस्से में साईं बाबा की मूर्ति स्थापित है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्यों के जाने के बाद मूर्ति के बाएं पैर का अंगूठा टूटा मिला. घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया. मामले की जानकारी मिलने पर इंस्पेक्टर विजय कुमार चौरसिया बल के साथ पहुंचे. वहां पहुंचकर उन्होंने मामले की जांच शुरू की. उन्होंने सीसीटीवी फुटेज खंगाली. इस मामले में जैतपुरा पुलिस ने स्थानीय लोगों की तहरीर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके 20 शिष्यों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. Also Read - यूपी में भी आगे बढ़ सकता है लॉकडाउन, सीएम योगी के साथ मीटिंग के बाद अधिकारी ने दिए संकेत

पुलिस के आरोपों को स्वामी ने सिरे से नकारा
मूर्ति क्षतिग्रस्त किये जाने के आरोप को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने निराधार बताया हैं. उन्होंने कहा कि काशी के प्राचीन मंदिरों की मूर्तियों को बचाने के लिए ही वह आंदोलन कर रहे हैं. इसी निमित्त उनकी पदयात्रा हो रही है. हमने क्षेत्र के जागेश्वर महादेव समेत प्राचीन मंदिरों में दर्शन-पूजन किया. हमलोग सनातन धर्म के मंदिरों में साईंबाबा की मूर्तियों को स्थापित किये जाने के विरुद्ध हैं. सनातनी परम्परा के अनुसार इसके लिए हमने सिद्धांत भी निरूपित किया है. बावजूद हम या हमारे अनुयायी किसी भी मंदिर में स्थापित मूर्ति को तोड़ने में विश्वास नही रखते.