लखनऊ: यूपी के सीएम योगी आदित्‍यनाथ के भगवान हनुमान को दलित वर्ग का बताने के बाद मामला थमा नहीं था कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष नंद कुमार साय के बयान में बवाल मचा दिया. नंद कुमार साय ने हनुमान को जनजाति (आदिवासी) वर्ग का बताया है. Also Read - दिल्ली में 'आप' संकट में है तो केजरीवाल को संकट मोचन याद आ रहे हैं: प्रकाश जावड़ेकर

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उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में पहुंचे राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष नंद कुमार साय ने सीएम योगी के बयान का खंडन करते हुए कहा कि हनुमान के नाम से अनुसूचित जनजाति में भी एक गोत्र होता है. मसलन, तिग्गा है. तिग्गा कुड़ुक में है. तिग्गा का मतलब बंदर होता है. साथ ही उन्‍होंने कहा कि हमारे यहां कुछ जनजातियों में हनुमान गोत्र है. इसके अलावा कई जगह तो गिद्ध गोत्र भी मौजूद है. लोग समझते हैं कि भगवान राम की सेना में वानर थे, बंदर थे, भालू थे, रीक्ष थे, गिद्ध थे, आप कभी शोध करें तो देखेंगे कि उसमें शामिल लोग जनजाति वर्ग के थे.

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राम की सेना में शामिल लोग थे जनजाति वर्ग के

उन्होंने कहा कि जिस दंडकारण्य में भगवान राम ने सेना बनाई थी उसमें ये जनजाति के लोग आते हैं. इसलिए हनुमान दलित नहीं, जनजाति के हैं. साय ने आगे कहा कि कौन जनजाति किस वर्ग से है, यह निर्णय करने का अधिकार केवल जनजाति आयोग के पास है. बता दें कि बुधवार को अलवर जिले के मालाखेड़ा में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने बजरंगबली को दलित, वनवासी, गिरवासी और वंचित करार दिया था. योगी ने कहा कि बजरंगबली एक ऐसे लोक देवता हैं जो खुद वनवासी हैं, गिर वासी हैं, दलित हैं और वंचित हैं.