नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गैंगस्टर विकास दुबे एनकाउंटर मामले की जांच के लिए बुधवार को शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश बी.एस चौहान की अगुवाई में तीन सदस्यीय जांच आयोग की नियुक्ति को मंजूरी दे दी और इसे दो महीने के भीतर अदालत और उत्तर प्रदेश (यूपी) सरकार को रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा. प्रधान न्यायाधीश एस.ए. बोबडे की अगुवाई वाली पीठ ने उत्तर प्रदेश पुलिस से यह भी कहा कि वह खूंखार बदमाशों के खात्मे के लिए अब एनकाउंटर का सहारा न ले.Also Read - यूपी ने बनाया नया रिकॉर्ड, 24 घंटे में 10 लाख 6 हजार से अधिक लोगों को लगाया गया कोरोना का टीका

उप्र पुलिस का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि विकास दुबे और उसके साथियों के एनकाउंटर मामले की जांच के लिए राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश चौहान का नाम तीन सदस्यीय जांच आयोग का नेतृत्व करने के लिए प्रस्तावित किया है. आयोग के अन्य दो सदस्यों में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश शशिकांत अग्रवाल और पूर्व पुलिस महानिदेशक के.एल. गुप्ता हैं. Also Read - Vodafone-Idea Share Update: AGR कैलकुलेशन की याचिका खारिज होने के बाद वोडाफोन-आइडिया के शेयर गिरे

शीर्ष अदालत ने कहा कि न्यायमूर्ति चौहान की समिति को सचिवालयीय सहायता केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी, न कि राज्य सरकार द्वारा. पीठ ने दुबे एनकाउंटर की जांच की निगरानी करने से भी इनकार कर दिया. प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “सिर्फ इसलिए कि इसे इतना प्रचार मिला है, हम आपराधिक जांच की निगरानी शुरू नहीं कर सकते.” आयोग एक सप्ताह के भीतर काम करना शुरू कर देगा. Also Read - UP: पूर्व मंत्री समेत 5 आरोपियों को कोर्ट ने 26 साल पुराने मर्डर केस में उम्रकैद सुनाई