लखनऊ : प्रमोशन में आरक्षण को लेकर घमासान मच गया है. एक तरफ तो केंद्र के फैसले से सामान्य और पिछड़े वर्ग के कर्मचारियों में आक्रोश है, वहीँ दूसरी तरफ एससी/एसटी वर्ग के कर्मचारी भी सरकार के निर्णय से पूर्णतया संतुष्ट नहीं हैं. सरकार के फैसले के विरोध में प्रमोशन में आरक्षण खत्म करने की मांग को लेकर आंदोलनरत कर्मचारियों ने रविवार को लोहिया पथ स्थित 1090 चौराहे से राजीव चौक तक दौड़ लगाकर प्रदर्शन किया और सरकार को प्रमोशन में आरक्षण से बाज आने की चेतावनी दी. चेतावनी दौड़ में काफी बड़ी संख्या में अधिकारियों, कर्मचारियों ने भाग लिया. वहीँ आरक्षण समर्थकों ने भी लोहिया पथ के पास स्थित आंबेडकर स्मारक से मार्च निकाला.

सामान्य और पिछड़ा वर्ग ने मनाया काला दिवस
सर्वजन हिताय संरक्षण समिति के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे के मुताबिक केंद्र की प्रमोशन में आरक्षण देने की कोशिशों के विरुद्ध देश भर के सामान्य व पिछड़ा वर्ग कर्मचारी और अधिकारी काला दिवस मना रहे हैं. लखनऊ में आयोजित चेतावनी दौड़ की अगुवाई वायु सेना से रिटायर्ड 80 वर्षीय एयर मार्शल आर के दीक्षित ने की. दूसरी तरफ रिटायर्ड जस्टिस खेमकरन ने डॉ. भीमराव आम्बेडकर पार्क से हरी झंडी दिखाकर आरक्षण बचाओ पैदल मार्च को रवाना किया.

आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अवधेश वर्मा के अनुसार आरक्षण बचाओ पैदल मार्च निकालने का उद्देश्य प्रमोशन में आरक्षण बहाली के लिए संशोधन विधेयक पारित कराने की मांग है. उनका कहना है कि प्रोन्नति  में आरक्षण 17 जून-1995 को लागू हुआ था. इस वजह से हमने रविवार 17 जून को सभी जिलों में स्वाभिमान दिवस मनाए जाने का फैसला किया. समिति के मुताबिक़ उत्तर प्रदेश में आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 3 (7) 15 नवंबर 1997 को बहाल किए बिना इसका लाभ यहां के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कर्मचारियों को नहीं मिलेगा.

देश व्यापी आंदोलन की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद प्रमोशन में आरक्षण देने के केंद्र सरकार के शुक्रवार के फैसले को लेकर अब आरक्षण समर्थक और विरोधी फिर आमने-सामने हैं. जनरल और ओबीसी कैटेगरी के कर्मचारियों में सरकार के इस फैसले के खिलाफ काफी आक्रोश है. प्रमोशन में रिजर्वेशन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ चुकी ‘सर्वजन हिताय संरक्षण समिति’ के नेताओं ने सरकार से इस आदेश को वापस लेने का मांग की है.

सर्वजन हिताय संरक्षण समिति के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे का आरोप है कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की गलत व्याख्या कर रही है. उन्होंने कहा कि ऐसे में अगर सरकार ने इस फैसले को तत्काल वापस नहीं लिया तो उत्तर प्रदेश के कर्मचारी, अधिकारी और शिक्षक अन्य प्रदेशों के साथियों के साथ मोर्चा बनाकर देशव्यापी आंदोलन करेंगे.