लखनऊ: यूपी के वाराणसी में मेढक की शादी कराई गई. इसे लेकर सोशल मीडिया में हलचल है कि अंधविश्वास को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन बुंदलेखंड में भी इस प्रथा को लोग प्रकृति के लिए शुभ मानते हैं. यूपी के सबसे सूखे और बदहाल इलाके में से एक बुंदेलखंड में मान्यता है कि ऐसा करने से बारिश होने लगती है. इसीलिए लोग न सिर्फ असली मेढक-मेढकी को पकड़ उनकी शादी कराते हैं. उनके फेरे कराते हैं, बल्कि बैंड बाजे की धुन पर नाचते भी हैं.

इसे अंधविश्वास नहीं मानते लोग
ऐसी शादियों में शामिल हो चुके सोशल एक्टिविस्ट आशीष सागर कहते हैं कि बनारस और छतरपुर में हाल ही कराई गई ऐसी शादी को लेकर सोशल मीडिया पर मजाक उड़ रहा है, लेकिन गांव के लोग इसे अंधविश्वास नहीं मानते. गांव के लोग इसे प्रकृति के करीब जाना मानते हैं. लोगों का मानना है कि ऐसा करने से बारिश होगी और वह खेती कर सकेंगे. सउदी अरब का प्रमुख चैनल अल जजीरा इस पर डॉक्यूमेंट्री मूवी भी बना चुका है.

शादी के दौरान लोग नाचते गाते हैं.

शादी के दौरान लोग नाचते गाते हैं.

 

मेढक की ओर वर पक्ष, तो मेढकी की ओर से वधु पक्ष निभाते हैं रस्में
जी हां, बुंदेलखंड में मेढक-मेढकी की शादी का रिवाज है. ऐसा अक्सर गर्मियों के दौरान किया जाता है. बुंदेलखंड के बांदा सहित अन्य जिलों में गर्मी आते ही मेढक-मेढकी की शादी के आयोजन धूमधाम से कराए जाने की शुरुआत हो जाती है. शादी कराने के लिये मेढक को वर व मेढकी को वधू पक्ष बनाया जाता है.

शादी का नया जोड़ा पहनाते हैं लोग
दोनों अलग-अलग गांव या अलग मोहल्ले के लोग होते हैं. मेढकी को दुल्हन की तरह सजाया जाता है. मेढकी को हल्दी चावल लगाकर स्नान कराया जाता है. उसे लाल चुनरी ओढ़ाई जाती है. दुल्हा बने मेढक को हल्दी और उबटन लगाया जाता है. उसे स्नान कराया जाता है. मेढकी की आंखों में काजल लगाकर शादी का नया जोड़ा भी पहनाया जाता है. मेढक के सिर पर मोर मुकुट भी लगाया जाता है. इसके साथ ही मेढकी को हल्दी चावल लगाकर स्नान कराया जाता है.

शादी के बाद मेढकों को तालाब में छोड़ दिया जाता है.

शादी के बाद मेढकों को तालाब में छोड़ दिया जाता है.

 

बरात में घोड़ा चलता है साथ, नाचते हैं लोग
बरात गांव में ही निकलती है. घोड़ा भी साथ चलता है. बारात में शामिल लोग बैंड बाजे की धुन पर नाचते-गाते हुए वधु पक्ष के दरवाजे पहुंचते हैं. वधु पक्ष के यहां बारात पहुंचते ही स्वागत होता है. फिर उत्सव शुरू हो जाता है. इसके बाद शादी की रस्में शुरू होती हैं. मेढक और मेढकी को उठाकर मंडप तक ले जाते हैं. मेढकी-मेढकी को जयमाला की रस्म के बाद फेरे लगवाए जाते हैं. मंडप में वर पक्ष मेढक को और वधु पक्ष मेढकी को पकड़ अग्नि के सात फेरे लगाता है. रस्मों के संपन्न होने पर लोग भोजन करते हैं. सभी रस्मों के बाद मेढक-मेढकी को तालाब में छोड़ दिया जाता है.