लखनऊ: कैराना लोकसभा उपचुनाव में रालोद गठबंधन से जीतीं तबस्सुम हसन साल 2009 में कैराना सीट से समाजवादी पार्टी की सांसद रह चुकी हैं. उनके पति मुनव्वर हसन 1996 में यहां से सांसद थे और बाद में 2004 में वो बसपा के टिकट पर मुजफ्फरनगर के सांसद बने. तबस्सुम के ससुर अख्तर हसन 1984 में कैराना से कांग्रेस के सांसद थे. तबस्सुम के बेटे नाहिद हसन कैराना विधानसभा से समाजवादी पार्टी के विधायक हैं, यानी तबस्सुम के परिवार का कैराना लोकसभा ही नहीं बल्कि मुजफ्फरनगर लोकसभा में भी काफी दखल है. इस क्षेत्र की तीन बड़ी पार्टियों कांग्रेस, बीएसपी और एसपी से इस परिवार के रिश्ते तीन पीढ़ी पुराने हैं. Also Read - यूपी में कल से खुलने जा रहे मंदिर, मस्जिद और मॉल्स, योगी आदित्यनाथ का आदेश- नियमों का हो अनुपालन

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बता दें कि कैराना लोकसभा सीट बीजेपी सांसद हुकुम सिंह के फरवरी में हुए निधन के कारण खाली हुई है. यहां से बीजेपी से प्रत्‍याशी मृगांका सिंह से तबस्‍सुम हसन का सीधा मुकाबला था. तबस्‍सुम की राजनीति विरासत का हाल यह है कि उनके ससुर से लेकर बेटे तक सब राजनेता हैं. तबस्सुम हसन के परिवार की तो तीसरी पीढ़ी भी अब राजनीति में आ चुकी है. उनके ससुर चौधरी अख़्तर हसन सांसद रह चुके हैं, जबकि पति मुनव्वर हसन कैराना से दो बार विधायक, दो बार सांसद, एक बार राज्यसभा और एक बार विधान परिषद के सदस्य भी रहे हैं.

हसन परिवार का राजनीति कई दलों के बीच घूमी

दिवंगत सांसद हुकुम सिंह की तरह हसन परिवार भी कई राजनीतिक दलों के बीच घूमती रही है. 1984 में चौधरी अख्तर हसन कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुने गए. उनकी राजनीतिक विरासत उनके बेटे चौधरी मुनव्वर हसन ने संभाली और 1991 में पहली बार वो कैराना सीट से विधायक बने. इस चुनाव में उन्होंने हुकुम सिंह को हराया था. साल 1993 में भी मुनव्वर हसन विधायक बने. 1996 में कैराना लोकसभा सीट से वो सपा के टिकट पर और 2004 में सपा-रालोद गठबंधन के टिकट पर मुज़फ़्फ़रनगर से सांसद चुने गए. मुनव्वर हसन राज्यसभा और विधान परिषद के सदस्य भी रहे.

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बसपा के टिकट पर पहली बार सांसद बनी तबस्‍सुम

2009 में मुनव्वर हसन की पत्नी तबस्सुम हसन बसपा के टिकट पर कैराना लोकसभा सीट से सांसद चुनी गईं. 2014 में लोकसभा सदस्य बनने के बाद जब हुकुम सिंह ने कैराना विधानसभा सीट खाली की तो ये सीट एक बार फिर हसन परिवार के पास आ गई. अबकी बार मुनव्वर हसन और तबस्सुम हसन के बेटे नाहिद हसन ने सपा के टिकट पर यहां से जीत दर्ज की. बाद में 2017 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने ये सीट मृगांका सिंह को हराकर अपना कब्ज़ा बनाए रखा.