लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में गोवर्धन कस्बे में स्थित धार्मिक महत्व के गिरिराज पर्वत पर अतिक्रमण करने के मामले की सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय हरित अधिकरण के न्यायाधीश ने पूछा कि क्यों न गिरिराज पर्वत को हेरिटेज स्थल घोषित कर दिया जाए.

गौरतलब है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में लंबे समय से गोवर्धन के एक संत द्वारा स्थापित संस्था ‘गिरिराज परिक्रमा संरक्षण संस्थान’ बनाम राज्य मामले में सुनवाई चल रही है. एनजीटी के न्यायाधीश आर एस राठौर इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं. प्रख्यात पर्यावरणविद् एवं सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एमसी मेहता के स्थान पर वादकारी के वकील सार्थक चतुर्वेदी ने बताया कि बुधवार को सुनवाई प्रारंभ होते ही प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन एवं मामले से जुड़े सरकारी विभागों से अब तक की प्रगति रिपोर्ट मांगी गई.

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गिरिराज पर्वत की सीमा में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण सहन नहीं
न्यायमूर्ति राठौर ने जिला प्रशासन को गिरिराज पर्वत की सीमा में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न सहन किए जाने की ताकीद की. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन पहले परिक्रमा की सीमा में बड़े अतिक्रमण करके बैठे लोगों के खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश दिए. चतुर्वेदी ने बताया कि कोर्ट ने वन विभाग के अधिकारियों से कहा कि हजारों वर्ष पुराने ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के इस पर्वत को क्यों न हेरिटेज स्थल घोषित कर दिया जाए जिससे इसका संरक्षण हो जाएगा.