लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को डिमोट होने वाले पीएसी के हेड कांस्टबेल तथा सब इंस्पेक्टर (एसआई) के मामले में बड़ा फैसला लिया है. योगी ने डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी को पीएसी के हेड कांस्टेबल और सब-इंस्पेक्टर को तुरंत प्रमोशन देने का निर्देश जारी किया है. योगी ने कहा कि शासन के संज्ञान में लाए बगैर ऐसी कार्रवाई से पुलिसबल के मनोबल पर प्रभाव पड़ता है. ऐसे में सभी का प्रमोशन तुरंत किया जाए. यूपी पुलिस में आए पीएसी के 900 जवानों को प्रमोशन मिलना था, लेकिन उन्हें पीएसी में वापस भेजते हुए अधिकारी ने डिमोशन कर दिया. मामला बिना शासन के संज्ञान में लाये ऐसा आदेश देने वाले अधिकारियों के विरुद्ध जांच के भी निर्देश दिए गए. मामले में एडीजी स्थापना पीयूष आनंद व अन्य अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.Also Read - UP News: क्या यूपी में बढ़ेगी बिजली की कीमत? नियामक आयोग का टैरिफ जारी- जानें क्या है जानकारी...

मुख्यमंत्री ने पीएसी के कतिपय जवानों को पदावनत करने के प्रकरण को गम्भीरता से लेते हुए पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया है कि वह समस्त कार्मिकों की नियमानुसार पदोन्नति सुनिश्चित कराएं. मुख्यमंत्री ने कहा है कि शासन के संज्ञान में लाए बगैर ऐसी कार्रवाई से पुलिस बल के मनोबल पर प्रभाव पड़ता है. शासन के संज्ञान में प्रकरण को लाए बगैर ऐसा निर्णय जिन अधिकारियों ने लिया है, उन सभी का उत्तरदायित्व निर्धारित कर शासन को आख्या भी उपलब्ध कराएं. योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने पीएसी के कुछ डिमोट किए गए जवानों को तुरंत प्रमोशन देने का फैसला किया है. इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रमोशन देने में अड़ंगा लगाने वाले एडीजी के खिलाफ जांच के आदेश भी दे दिए हैं. Also Read - UP News: उत्तर प्रदेश में अगले 25 सालों तक शासन करेंगे, CM योगी के मंत्री बोले- 2017 में भी BSP-SP से कुछ नहीं हुआ

डीआईजी कार्मिक एवं स्थापना डॉ. राकेश शंकर की तरफ से सितंबर के दूसरे सप्ताह में जारी एक आदेश के तहत नागरिक पुलिस में हेड कांस्टेबल पद पर कार्यरत 890 पुलिस कर्मियों को डिमोशन करते हुए पीएसी में कांस्टेबल पद पर वापस भेजा गया था. वषों पहले पीएसी से नागरिक पुलिस में आए ये पुलिस कर्मी प्रोन्नत होकर हेड कांस्टेबल बने थे. इसी तरह एडीजी स्थापना की तरफ से डीएसपी स्थापना सुधीर कुमार सिंह द्वारा जारी एक आदेश के तहत विभिन्न जिलों में सब इंस्पेक्टर पद पर कार्यरत 6 पुलिस कर्मियों को पदावनत कर पीएसी में कांस्टेबल के उनके मूल पद पर भेज दिया गया था. डीएसपी स्थापना सुधीर कुमार सिंह की तरफ से ही जारी एक अन्य आदेश के तहत विभिन्न जिलों में कांस्टेबल पद पर तैनात 22 पुलिसकर्मियों को पीएसी में कांस्टेबल पद पर ही वापस भेज देने के आदेश थे. Also Read - यूपी: 90 दिन में हर ग्राम पंचायत में होगा ग्राम सचिवालय, गाँव के लोगों को बैंकिंग सेवा भी मिलेगी

डीजीपी मुख्यालय की तरफ से जारी आदेश में बताया गया था कि कांस्टेबल जितेन्द्र कुमार सिंह एवं तीन अन्य ने अपनी प्रोन्नति के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. हाईकोर्ट ने विभाग को याचिकाकर्ताओं के प्रत्यावेदन पर छह हफ्ते में निर्णय लेने का आदेश दिया था. चारों याचिकाकर्ता पीएसी संवर्ग में भर्ती हुए थे और परिचालनिक कारणों से जनपदीय पुलिस में स्थानान्तरित हुए थे. उनका काडर पर्वितन नहीं हुआ था. प्रत्यावेदन पर विचार कर संस्तुति देने के लिए विभाग ने एक चार सदस्यीय कमेटी बनाई.

कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कुल 932 कांस्टेबल पीएसी में भर्ती हुए थे. कमेटी ने इनमें से 910 को पदावनत कर कांस्टेबल के पद पर पीएसी काडर में वापस करने और 22 कांस्टेबल को उसी पद पर पीएसी काडर में वापस करने की सिफारिश की. इन 910 में से 6 वर्तमान में पुलिस में सब इंस्पेक्टर पद पर कार्यरत हैं. शेष 904 कर्मचारियों में से 14 या तो रिटायर हो गए हैं या उनका निधन हो गया है, जबकि 890 पुलिस कर्मी हेड कांस्टेबल पद पर कार्यरत हैं. पुलिस मुख्यालय का कहना है पुलिस में कांस्टेबल पद पर भर्ती के दो मूल कैडर हैं, नागरिक पुलिस व पीएसी. यह सभी अपने मूल काडर में ही प्रोन्नति पाते हैं. पीएसी से पुलिस में स्थानान्तरण के लिए जारी आदेश में काडर पर्वितन का कोई उल्लेख नहीं किया गया था और न ही नियमावली या शासनादेश में इसका कोई प्रावधान ही है.