लखनऊ: उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारक) अधिनियम के तहत तुरंत गिरफ्तारी के प्रावधान को खत्म करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले को केन्द्र सरकार द्वारा पलटे जाने को ‘दबाव में किया गया निर्णय’ करार दिया है. उन्होंने कहा है कि सरकार को ऐसे निर्णय लेने से बचना चाहिये, जिनसे वर्ग संघर्ष के हालात पैदा हों.

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शुक्रवार को बरेली पहुंचे प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री राजभर ने संवाददाताओं से कहा कि एससी/एसटी कानून के तहत दर्ज मुकदमों में बिना जांच के गिरफ्तारी करने से गैर अनुसूचित जाति के लोगों का शोषण और उत्पीड़न होगा. इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने पूर्व में जो फैसला दिया था, वह सही था. उन्होंने कहा कि राज्यसभा में अनुसूचित वर्ग के सांसदों की संख्या ज्यादा है, लिहाजा केंद्र सरकार ने दबाव में आकर पुरानी व्यवस्था बहाल करा दी है. सरकार किसी भी दबाव में ऐसे फैसले ना ले, जिससे वर्ग संघर्ष जैसी स्थिति पैदा हो.

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सवर्ण व पिछड़ा वर्ग में सरकार बनाने और गिराने की ताकत
प्रदेश में भाजपा के सहयोगी दल ‘सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी’ के अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि केन्द्र की भाजपा सरकार ने वोट बैंक की राजनीति के चलते गलत विधेयक पारित करा दिया है, जबकि सवर्ण और पिछड़ा वर्ग किसी भी सरकार को बनाने और गिराने की ताकत रखते हैं. उच्चतम न्यायालय ने हाल में एक आदेश में अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारक) अधिनियम के तहत बिना जांच किये तुरंत गिरफ्तारी के प्रावधान को खत्म कर दिया था. उसके बाद केन्द्र सरकार ने इसी महीने संसद में एक संशोधन विधेयक पारित करके पुरानी व्यवस्था को बहाल कर दिया था. राजभर ने कहा कि उनकी दोस्ती भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से है. इस वजह से वर्ष 2022 तक उनकी पार्टी भाजपा के साथ हैं लेकिन अगर भाजपा सरकार कुछ गलत करेगी तो वह उसका विरोध भी करते रहेंगे.