लखनऊ/बांदा : इसे अधिकारियों की लापरवाही कहें या बालू माफियाओं को लाभ पहुंचाने की तरकीब? लेकिन इतना तो तय है कि उत्तर प्रदेश में बालू खदान माफिया की पुलिस के अच्छी सांठगांठ है. बांदा जिला मुख्यालय से सटी केन नदी की दुरेंडी बालू खदान में बुधवार शाम छापा मारने गई अधिकारियों और पुलिस का संयुक्त दल दो घंटे तक खदान ही नहीं ढूंढ़ पाया. अलबत्ता जलधारा में खनन कर रहीं मशीनों के गायब होने के बाद ‘सब कुछ ठीक’ बताकर लौट आए.

सूत्रों की मानें तो लगातार मीडिया में आ रहीं खबरों का स्वत: संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने मंगलवार को बांदा जिलाधिकारी को जिले की सभी बालू खदानों के स्थलीय निरीक्षण और मशीनों से हो रहे बालू खनन पर पाबंदी लगाने के निर्देश दिए थे. इसी निर्देश के अनुपालन में जिलाधिकारी ने बुधवार की शाम खनिज अधिकारी को पुलिस क्षेत्राधिकारी, तहसीलदार सदर के अलावा कई थानों के पुलिस बल के साथ जिला मुख्यालय से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित दुरेंड़ी बालू खदान में छापामारी के लिए भेजा था. पहले सिंचाई मंत्री को ठेंगा दिखाने के बाद खनिज अधिकारी ने अबकी बार कई अधिकारियों की आंखों में धूल झोंक दिया.

करीब दो घंटे तक इधर-उधर चक्कर काटने के बाद यह दल चिन्हित बालू खदान में तब पहुंचा, जब जलधारा के अवैध खनन में लगी सभी छह एलएनटी मशीनें हटा दी गईं. इत्तेफाक से छापेमारी की सूचना पर कुछ इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के संवाददाता बालू खदान में छापामार दल से पहले ही पहुंच गए थे और जलधारा की खनन के फोटो/वीडियो शूट कर लिए थे. एक निजी न्यूज चैनल के अनुसार, “अधिकारियों का दल करीब पौने सात बजे शाम को दुरेंडी बालू खदान पहुंचा था. इसके पहले सभी मशीनें वहां हटा दी गई थीं.”

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बांदा के खनिज अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने गुरुवार को बताया कि ‘बुधवार की शाम दुरेंड़ी बालू खदान में सीमा क्षेत्र से हटकर खनन करने की सूचना पर पुलिस के साथ छापेमारी की गई है, लेकिन वहां ‘सब कुछ ठीक’ मिला है. मौके पर छह एलएनटी मशीनें नदी किनारे खनन करते पायी गई हैं. नदी के जल विहीन क्षेत्र में खनन के लिए पट्टाधारक को पर्यावरण और खनिज विभाग से अनगिनत मशीनों के इस्तेमाल की अनुमति मिली हुई है.’ केन नदी की बीच जलधारा में खनन का वीडियो दिखाकर सवाल पूछा गया तो खनिज अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने कहा, “यह वीडियो हमें दे दो. हम जिलाधिकारी को भेजकर पट्टाधारक से स्पष्टीकरण मांगने की गुजारिश करेंगे.”

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गुरुवार को सुबह 10.13 बजे जिलाधिकारी का सरकारी मोबाइल फोन (9454417531) फिर स्विच ऑफ था. जिले में खनिज संपदा के प्रभारी और अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) संतोष बहादुर सिंह से फोन पर बात की गई तो उन्होंने कहा कि मीडियाकर्मी पुराने वीडियो को नया बताकर बखेड़ा खड़ा कर रहे हैं. जिले की हर बालू खदान में शासन की मंशा के अनुसार खनन कार्य हो रहा है.

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बुधवार की इस छापेमारी पर ‘बुंदेलखंड आजाद सेना’ के केंद्रीय अध्यक्ष प्रमोद आजाद ने आरोप लगाया कि खनिज अधिकारी सोची-समझी रणनीति के तहत जानबूझ कर छापामार दल के साथ खदान में बिलंब से पहुंचे, ताकि केन नदी की जलधारा में खनन में लगी सभी मशीनें हटाई जा सकें. उन्होंने सवाल किया कि क्या अवैध खनन और नदियों की जलधारा रोकना ही शासन की मंशा है? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस खनिज अधिकारी ने ई-टेंडिरिंग और खनन पट्टा आवंटन से पूर्व संबंधित बालू खदान का भौतिक सत्यापन और सर्वेयर भेज कर बालू की मात्रा का मूल्यांकन कराया हो, उसे ही शहर से एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित चिन्हित खदान तक पहुंचने में दो घंटे लगें तो दूर दराज की बालू खदानों की हालत का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है.