भारत आज जहां आजादी का 79वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है वहीं आज भी देश की बस्तियों में रहने वाले लाखों लोग भूख और गरीबी से जूझ रहे हैं. बच्चे रोटी के लिए तरस रहे हैं, परिवार एक समय के खाने को मोहताज हैं. उनकी आंखों में भूख और दर्द की गहराई देखकर आपका दिल पसीज जाएगा. गंदे नालों के किनारे, टूटी-फूटी झोपड़ियों में रहने वाले ये बच्चे हर दिन भोजन की तलाश में भटकते हैं. कई बार कूड़े के ढेर से बचा हुआ खाना उनकी भूख मिटाने का एकमात्र सहारा बनता है. माता-पिता, जो ज्यादातर दिहाड़ी मजदूर हैं, दिनभर की मेहनत के बाद भी अपने बच्चों के लिए पर्याप्त भोजन नहीं जुटा पाते.