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चुनाव जीतने के बाद मंत्रियों को क्यों दिलाई जाती है शपथ, क्या होता है इसका अर्थ, देखें वीडियो

किसी पवित्र चीज को साक्षी मानकर कार्यो को पूरा करने की शपथ लेना ही शपथ ग्रहण कहलाता है.

Published: March 16, 2022 10:00 PM IST

By Nitin Gupta

Oath Taking Ceremony history: हर किसी के जहन में एक सवाल जरूर उठता है कि जब सीएम पद या पीएम पद का फैसला होता है तो शपथ (Oath) समारोह का आयोजन क्यों होता है. क्यों लेते हैं शपथ. आइए हम आपको बताते हैं. किसी भी पद को संभालना एक (histoy of oath taking ceremony) संवैधानिक प्रकिया है. किसी पवित्र चीज को साक्षी मानकर कार्यो को (Oath taking ceremony) पूरा करने की शपथ लेना ही शपथ ग्रहण कहलाता है. सांसद या विधायकों को शपथ लेनी होती है. वहीं सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट (high court) के चीफ जस्टिस (chief justice) और भारत के राष्ट्रपति को भी पद संभालने से (oath taking ceremony video) पहले शपथ लेनी होती है. शपथ ग्रहण (sapath grahan) की प्रकिया की बात करें तो सभी संवैधानिक पदों की शपथ लेने के बाद नेताओं को एक संवैधानिक परिपत्र पर एक सिग्नेचर करना होता है. यह बहुत ही महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, जो कि राष्ट्रपति और राज्यपाल द्वारा संरक्षित किया जाता है. शपथ ग्रहण की प्रकिया 1952 में हुए पहले लोकसभा से ही प्रचलित है. वीडियो में विस्तार से जानें शपथ ग्रहण के बारे में.

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