होलाष्टक शब्द होली और अष्टक से मिलकर बना है. जिसका मतलब होता है होली के आठ दिन. हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन (Holika Dahan 2021) किया जाता है. इसके बाद अगले दिन सुबह को रंग वाली होली खेली जाती है.Also Read - बिहार: होली खेलने निकली बच्ची का शव बालू में दबा मिला, रेप के बाद हत्या की आशंका, 3 अरेस्ट

2021 Holashtak Date?
इस बार होलिका दहन 28 मार्च 2021 को किया जाएगा. इसके आठ दिन पहले से होलाष्टक (Kab Se Lag Rahe Hain Holashtak ) लग जाते हैं. इस साल 22 मार्च से 28 मार्च 2021 तक के बीच होलाष्टक (Holashtak 2021) है. Also Read - थाने में फोन कर की पत्नी की ऐसी शिकायत, भड़की पुलिस ने शिकायत करने वाले पति को ही भेज दिया जेल

होली 2021 की तारीख और शुभ मुहूर्त- (Holi 2021 Shubh Muhurat)
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – मार्च 28, 2021 को 03:27 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त – मार्च 29, 2021 को 00:17 बजे
होलिका दहन रविवार, मार्च 28, 2021 को
होलिका दहन मुहूर्त – 18:37 से 20:56
अवधि – 02 घंटे 20 मिनट Also Read - होली के जश्न में इतना खोया युवक, डांस करते हुए खुद को मार लिए चाकू, मौत

शुभ एवं मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि के लिए होलाष्टक का समय उपयुक्त नहीं माना जाता, लेकिन फाल्गुन के माह में भगवान कृष्ण और शिव जी को समर्पित होता है, इसलिए होलाष्टक की अवधि में इनकी पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है.

होलाष्टक में क्यों नहीं किए जाते शुभ कार्य
ज्योतिष शास्त्र का कहना है कि इन दिनों में वातावरण में नेगेटिव एनर्जी काफी रहती है. होलाष्टक के अष्टमी तिथि से लेकर पूर्णिमा तक अलग-अलग ग्रहों की नकारात्मकता काफी बढ़ती है. जिस कारण इन दिनों में शुभ कार्य न करने की सलाह दी जाती है.

इनमें अष्टमी तिथि को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चुतर्दशी को मंगल तो पूर्णिमा को राहु की ऊर्जा काफी नकारात्मक रहती है.

इसी कारण यह भी कहा जाता है कि इन दिनों में जातकों के निर्णय लेने की क्षमता काफी कमजोर होती है जिससे वे कई बार गलत निर्णय भी कर लेते हैं जिससे हानि होती है. होलाष्टक में भले ही शुभ कार्यों के करने की मनाही है लेकिन देवताओं की पूजा अर्चना कर सकते हैं.