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UP Election 2022: केंद्र बिन्दु क्या होगा और किसकी दावेदारी है मज़बूत?

उत्तर प्रदेश देश के उन राज्यों में जहां राजनीतिक अस्थिरता लगातार बनी रही है. न तो क्षेत्रीय दल अपना गढ़ मजबूत कर पाए और ना ही राष्ट्रीय पार्टियां वोटरों का भरोसा जीत सकीं. आज़ादी के बाद 9 बार राष्ट्रपति शासन और 21 मुख्यमंत्री देख चुके उत्तर प्रदेश ने किसी भी मुख्यमंत्री को सत्ता में रहते हुए अगली बार फिर से कुर्सी नहीं सौंपी.

Published: December 13, 2021 9:00 PM IST

By Devendra Tripathi | Edited by Video Desk

UP Vidhansabha election 2022: Is Development Modal of Modi will work again: विकास के दावों के बीच BJP के लिए राज्य का इतिहास चुनौती। 9 बार राष्ट्रपति शासन और 21 मुख्यमंत्री देख चुके उत्तर प्रदेश ने किसी भी मुख्यमंत्री को सत्ता में रहते हुए अगली बार फिर से कुर्सी नहीं सौंपी. UP में 2022 की शुरुआत में चुनाव होने हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ताबड़तोड़ दौरे कर रहे हैं. पूर्वाञ्चल को साधने की कोशिश है. पहले वाराणसी, उसके बाद गोरखपुर, बलरामपुर और अब फिर से वाराणसी. बड़ी-बड़ी परियोजनाओं का लोकार्पण किया जा रहा है. उम्मीद जनता को विकास के बहाने अपने पक्ष में बनाए रखने में सफल होने की है.

हालांकि इस बार UP के चुनाव के केंद्र में है MY. भारतीय जनता पार्टी का MY है Modi-Yogi

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समाजवादी पार्टी का MY है Muslim-Yadav हालांकि सपा अपने MY को महिला-यूथ कह रही है जबकि भाजपा इसे मुस्लिम-यादव का abbreviation बात रही है.

किसका M-Y काम करेगा, किसके MY में दम है इसका पता तो 2022 में ही चलेगा.

राज्य में चुनावी सरगर्मियाँ तेज़ हो गई हैं. नेताओं की दल बदली भी पूरे जोर शोर से हो रही है.

कोई टिकट कटने की आशंका से पार्टी बदल रहा है तो कोई अपनी पार्टी की हार के डर से संभावित विजेता का दामन थाम रहा है.

राज्य में Pre-Poll सर्वे शुरू हो गए हैं. योगी की लोकप्रियता बरकरार है, लेकिन UP का राजनीतिक इतिहास भाजपा को भी डरा रहा है.

उत्तर प्रदेश देश के उन राज्यों में जहां राजनीतिक अस्थिरता लगातार बनी रही है. न तो क्षेत्रीय दल अपना गढ़ मजबूत कर पाए और ना ही राष्ट्रीय पार्टियां वोटरों का भरोसा जीत सकीं.

आज़ादी के बाद उत्तर प्रदेश का राजनीतिक इतिहास अगर देखें:

9 बार राष्ट्रपति शासन और 21 मुख्यमंत्री देख चुके उत्तर प्रदेश ने किसी भी मुख्यमंत्री को सत्ता में रहते हुए अगली बार फिर से कुर्सी नहीं सौंपी.

1990 से राजनीतिक उथल-पुथल के बीच 16 वर्षों के बाद 2007 में किसी पार्टी को बहुमत 2007 में मिल। वह पार्टी थी मायावती कि बहुजन समाज पार्टी.

मायावती चौथी बार राज्य की बागडोर संभाल रही थीं. इससे पहले 1995, 1997 और 2002 में वो बन चुकी थीं मुख्यमंत्री लेकिन किसी भी बार न तो पूर्ण बहुमत था और न कार्यकाल पूरा करने का मौका.

उत्तर प्रदेश ने 2012 में उनकी चिर प्रतिद्वंद्वी पार्टी सपा पर अपना भरोसा जताया और युवा अखिलेश यादव को CM चुना, खूब चर्चे रहे, युवा अखिलेश से लोगों को उम्मीदें थीं.

हर वर्ग का युवा उनमें अपना रोल मॉडल देखने लगा था, जिससे सपा और बसपा की जातीय राजनीति से कुछ अलग करने की उम्मीदें थीं, लेकिन यह उम्मीदें पूरी नहीं हुई और 2017 के चुनाव में मोदी के विकास के दावों की आंधी में अखिलेश भी में उड़ गए,

403 सीटों वाली विधानसभा में BJP ने 309 सीटों पर जीत दर्ज कर एक नया कीर्तिमान रच दिया.

BJP में एक समय लोगों को नापसंद रहे योगी आदित्यनाथ को पार्टी ने सूबे की कमान सौंपी.

अब योगी के सामने चुनौती है उत्तर प्रदेश में राजनीतिक इतिहास को बदलने की है.

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