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No Confidence Motion: मणिपुर में हो रही हिंसा को लेकर विपक्ष काफी ज्यादा गुस्से में है और रोज सदन में हंगामा हो रहा है. बात अविश्वास प्रस्ताव तक पहुंच गई है. ऐसे में हम ये जानने की कोशिश करेंगे की आखिरकार अविश्वास प्रस्ताव होता क्या है? इसमें कितनी ताकत है? क्या ये सरकार गिरा देती है?
अविश्वास प्रस्ताव होता क्या है?
अविश्वास प्रस्ताव जिसे No Confidence Motion भी कहा जाता है. ये एक पार्लियामेंट्री प्रोसेस है. जिससे विपक्ष सरकार को चुनौती दे सकता है और अगर ये प्रस्ताव सदन में पास हो जाता है तो सत्ता में बैठी सरकार को इस्तीफा देना पड़ता है.
हालांकि ये पूरा प्रोसेस इतना भी आसान नहीं होता. इसे लेकर कई सारे प्रोसेस और नियम होते हैं.
अविश्वास प्रस्ताव को लेकर क्या नियम हैं?
यानी अगर सदन में सत्ता में बैठी पार्टी बहुमत से ज्यादा वोट पाती है तो सरकार बच जाती है. लेकिन अगर वोट बहुमत से कम होते हैं तो सरकार को इस्तीफा देना पड़ता है. वैसे अविश्वास प्रस्ताव को विपक्ष का हथियार भी कहा जता है. लेकिन क्यों?
वैसे तो विपक्षी दल ज्यादातर सरकार पर दबाव बनाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लेकर आते हैं. मोदी सरकार के खिलाफ ही ये दूसरी बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है. इस प्रस्ताव के जरिए विपक्ष सरकार के फेलियर को सदन में उठाती है और इस पर बात करने का उन्हें मौका मिलता है. इससे विपक्ष एकजुट भी होता है.
क्या कभी अविश्वास प्रस्ताव से सरकार गिरी है?
वैसे तो अविश्वास प्रस्ताव का दौर जवाहर लाल नेहरू के वक्त से ही देखने को मिल रहा है… लेकिन मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह, वीपी सिंह और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं ने अविश्वास प्रस्ताव के कारण अपनी सरकारें गिरती देखीं. चौधरी चरण सिंह ने बहुमत साबित करने से पहले ही इस्तीफा दे दिया था.
तो ये थे अविश्वास प्रस्वात के रूल्स, रेगुलेशन्स और इसके पूरा प्रोसेस, जिससे सरकार गिर जाती हैं.
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