Corona VIrus: मदुरै की सड़कों घूम-घूमकर भीख मांगने वाले एक भिखारी ने कोविड राहत कोष में 90000 रुपये जमा कराए हैं. सुनकर कुछ अजीब सा लगता है, लेकिन ये सच है. भिखारी का नाम पूलपांडियन है जिनकी समाज के लिए किए गए इस सराहनीय कार्य से प्रभावित होकर जिला कलेक्टर टी. जी. विनय की ओर से पुरस्कार दिया गया है. पूलपांडियन ने भीख मांगकर जिला प्रशासन के माध्यम से पिछले तीन महीनों में मुख्यमंत्री राहत कोष में अब तक 90,000 रुपये का दान दिया है. Also Read - कोरोना की वापसी! इस राज्य के मुख्य शहर में लगा कर्फ्यू, जानें क्या है घर से नहीं निकलने की टाइमिंग

10-10 हजार का नौ बार दिया दान Also Read - Corona Virus India Latest Update: दिल्ली-महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में कोरोना के नए चौंकाने वाले आए सामने, सुरक्षा ही बचाव

जानकारी के मुताबिक पूलपांडियन ने 18 मई को पहली बार मुख्यमंत्री राहत कोष में 10,000 रुपये का अपना पहला दान दिया था. इसके बाद से वे पैसे लेकर कलेक्टर कार्यालय में आठ बार पहुंचे और उन्होंने अपनी ओर से हर बार 10,000 रुपये का दान दिया है. कुल मिलाकर नौ बार में उन्होंने 10-10 हजार रुपये की राशि दान की है. Also Read - वैक्सीन लगवाई फिर भी MBBS स्टूडेंट की कोरोना संक्रमण से मौत, 10 छात्र चपेट में, बिहार के मेडिकल कॉलेज में हड़कंप

इस बार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिला कलेक्टर की तरफ से पुरस्कार पाने वालों की सूची में पूलपांडियन का नाम भी शामिल किया गया था, लेकिन उस दिन उन्हें सम्मानित नहीं किया जा सका. क्योंकि उस दिन जब पुरस्कार देने के लिए उन्हें खोजा गया तो वो नहीं मिले. वो एक जगह नही रहते हैं. इसके बाद जब वो नौंवी बार राहत कोष में पैसे जमा कराने आए तो उन्हें सीधे कलेक्टर के कमरे में लाया गया और उन्हें सम्मानित किया गया.

सरकारी स्कूल को देते हैं भीख के पैसे
पूलपांडियन, तूतीकोरिन जिले के मूल निवासी हैं. गरीबी और अपनों की उपेक्षा की वजह से वे भीख मांगने लगे क्योंकि उनके दोनों बेटों ने उनकी देखभाल करने से इनकार कर दिया था. इससे पहले उन्होंने टेबल, कुर्सियां खरीदने और पानी की सुविधा देने के लिए सरकारी स्कूलों को भी अपने भीख में मिले पैसे दान किए थे.